ख्वाब और हकीकत मे बडा फासला है,
केवल ख्वाब देखने से किसे क्या मिला है,
हमारा ही कुसूर था जो किसी ख्वाब को हकीकत समझा,
खुद पे शर्मिदां हूँ, अब तुमसे कहाँ गिला है,
…………………………… Shubhashish(2003)
ख्वाब और हकीकत
31 मार्चहर बार
31 मार्चहर मोड पर खुद को अकेला पाते हैं,
हर बार खुद से कुछ वादा कर जाते हैं,
हर बार लगता है शायद ये आखरी बार है,
पर हर बार हम जीतते-जीतते हार जाते हैं|
………………………….. Shubhashish(2003)
सीख लेते हैं लोग
31 मार्चशीशे की तरह टूट जाना हर ख्वाब का अंजाम है,
मुरझा के गिर जाना हर फूल का अंजाम है,
चीर देती हैं लहरें चट्टानों का भी सीना,
सीख लेते हैं लोग गम के साये मे जीना,
कर के आसूओं में दफन अपने दिल के अरमान को,
लोग जीते हैं ऐसे जैसे जिंदगी पे एहसान हो,
………………………….. Shubhashish(2001)
क्यों ऐसा बना दिया
30 मार्चक्यों मेरी जिन्दगी को ऐसा बना दिया,
दुख के कफन में मुझे जिंदा जला दिया,
मोहब्बत के ख्वाब में हकीकत जल गयी,
सुकुन के ख्वाब मे सबकुछ गवां दिया|
क्या रात और क्या दिन सब एक ही से लगते हैं,
रोते-रोते तेरी याद में खुद खो भूला दिया,
बीते पल का हिसाब रखते हैं नये पल गम ही देते हैं,
बीते पल को ही खुद का नसीब बना दिया|
……………………………Shubhashish(2001)
इन्तजार…
30 मार्चइतना ना तडपाओ कि दर्द के भी आँसू छलक जायें,
ये सजा मत दो प्यार मे कि हम दर्द की परिभाषा बन जायें,
युँ जला कर, गम दे कर, तडपा कर,
इतना मत इन्तजार करवाओ कि आँखें समय का पैमाना बन जायें |
………………………………….. Shubhashish(2000)
गर था ले रहा तु इम्तेहा
29 मार्चअब टुट के गिर गया हू,
तो क्यों नहीं फिर उठा रहा,
गर था ले रहा तु इम्तेहा तो,
अब जीत का एहसास क्यों नहीं दिला रहा,
हम तो हार गये,
और कर रहे हैं इल्तजा,
तो तु मेरे पास फिर,
क्यों नहीं आ रहा,
मेरी सासें हो रही हैं धीरे,
खत्म हो रही है धडकन,
क्यों नहीं तु मेरी,
सदा सुन पा रहा,
हम तो पागल से हो गये हैं,
अपना सब कुछ गवां कर,
अब क्यों नहीं,
तु मुझे अपना रहा |
…………… Shubhashish(2000)
हमारा मुकद्दर
28 मार्चजिंदगी की परिस्थितियाँ मजबूर करतीं हैं अगर,
तो आ छोड दे हम ये जहाँ,
मिल जायें मौत से हम अगर,
तो मौत ही होगी हमारा मुकद्दर |
……………………….. Shubhashish(2000)
मुझे तेरी जरूरत है
28 मार्चइस कदर उबे हैं जिंदगी से कि अब खुद से नफरत है,
सब कुछ लुटने के बाद भी दिल को अभी हसरत है,
अभी भी इसे उम्मीद है कि तुझे पा लेगा ये,
मेरी हर आह कहती है मुझे तेरी जरूरत है |
……………………………………… Shubhashish(2000)
आसुओं सगं गुजरती रात
28 मार्चदर्द बन कर दफन हो गयी सीने मे हर बात,
ना समझा सके हम अपनी मजबूरीयाँ और हालात,
वक्त ने इस लायक भी नहीं छोडा की कोई शिकवा करें,
बिन नींद, आसुओं के सगं गुजरती है हर रात |
…………………………………… Shubhashish(2000)
कभी महाबली खली तो कभी राखी सावंत पे विशेष : मीडिया का नया भेष
27 मार्चक्या हो गया है इन न्यूज़ चैनल्स को समझ नहीं आता की मीडिया अपने आप को बर्बाद करने पे क्यों तुली है | अभी बीते साल की बात करें तो जैसे न्यूज़ चैनल्स के पास कुछ रह ही नहीं गया है | सबसे तेज चैनल की हाल ये है की दिन भर वही न्यूज़ दिखाते हैं जिससे देश में अंधविश्वास बढे| एक बार तो पूरे दिन भर दिखाते रहे की बिना ड्राईवर के चलती है कार और बगल की सीट पे बैठा रहता है एक आदमी और रात में जा के बताये की वो बगल में बैठा आदमी ड्राईवर है जो लम्बी टांगो से गाड़ी को नियंत्रित करता है| आज कुछ दिन से एक नया मसाला हाथ आ गया है महाबली खली | लगता है जैसे पूरे देश में केवल एक ही आदमी जिंदा रह गया है और वो है खली | मजेदार बात तो ये है की बात पलटने में ये न्यूज़ चैनल सेकंड भी नहीं लगाते | अभी दो दिन लगातार रात की न्यूज़ में था “फिर हरा खली” और अगले दिन की खबर थी “खली फिर बना महाबली” |
उधर पिछले दिनों ऐश्वर्या और अभिषेक की शादी क्या हुई लोगो ने न्यूज़ छोड़ सीरियल देखना शुरू कर दिया क्या करें साहब इतना विस्तृत तो उसमे भी नहीं दिखता | हलवाई से लेके और चपरासी , पंडित से ले के नाऊ हर किसी का इंटरव्यू हो गया | अरे हद तब हो गयी जब न्यूज़ चैनल वालो ने उन्हें होनीमून में भी नहीं छोड़ा |
उधर राखी सावंत ने एक नया आइटम क्या कर दिया न्यूज़ चैनल ने उस ५ मिनट के गाने पे आधे घंटे का विशेष दिखाया और उसमे से आधा दो दिन बार फिर रिपीट किया क्यों की इसबार शाहरुख को मिक्स कर दिया | कभी दिन भर दिखाते हैं नागिन का बदला तो कभी कुछ और अनाप – शनाप |अब मीडिया को ये कौन समझाए की उनका काम मनोरंजन नहीं सच दिखाना है | क्योकि देश के प्रगति में उनका भी एक हिस्सा है एक जिम्मेदारी है | खैर हम ही कौन कम है अब जब मनोरंजन चैनल देखने का मन होता है खोल लेते हैं कोई न्यूज़ चैनल ………..सबसे तेज




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