मन को है तुझे देखने की प्यास
तूझ बिन बेचैन है मेरी हर एक सांस
उस एक क्षण के लिए छोड॰ सकता हूं ये जहाँ
जिस पल मे हो तेरी नजदीकी का एहसास
……………………………………… Shubhashish(1998)
नजदीकी का एहसास
March 21, 2008 by Shubhashish Pandey
Posted in Shayari - Muqtak | Tagged एहसास, नजदीकी का एहसास, Shubhashish | No Comments Yet
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