कुछ कहना तो चाहा था निगाहों ने
पर दर्द रह गया था बस इन आहों में
इन्तजार मे बेताब है एक-एक धडकन
चाहता हूँ फिर मिलूँ जिंदगी की राहों में
………………………………………….Shubhashish(1998)
बेताब धडकन
24 मार्च- टिप्पणियाँ 2s टिप्पणियाँ
- श्रेणी Shayari - Muqtak
2 Responses to “बेताब धडकन”
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“ye neegahen sunee hain taire jane ke badd,
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dilkee yhee aarju hai ab thujse dur hone ke badd,
kee kabhee mairee subeh na ho aaj raat soney ke badd…………”
bahut khub seema ji
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