गुमसुम सी तनहाइयों मे
March 25, 2008 by Shubhashish Pandey
गुमसुम सी तनहाइयों मे जैसे कोई छू जाता है,
अपने यहीं पे होने का एहसास दिलाता है,
तडप उठता है बेचैन दिल तुम से मिलने के लिये,
आँसु आँखों मे छूपाये फिर सहम जाता है |
…………………………Shubhashish(199 ![]()



मन को है तुझे देखने की प्यास
तूझ बिन बेचैन है मेरी हर एक सांस
उस एक क्षण के लिए छोड॰ सकता हूं ये जहाँ
जिस पल मे हो तेरी नजदीकी का एहसास