नजराना
March 26, 2008 by Shubhashish Pandey
अब तक तेरे प्यार मे सिर्फ गम ही मिले हैं,
पर तेरा नजराना समझ उसे दामन में कैद किये हैं,
आँसु जो बेताब हैं आखो से निकलने के लिए,
उसे प्यार की निशानी मान आँखों मे रोके हुये हैं |
……………………………………….. Shubhashish(1999)


