इतना ना तडपाओ कि दर्द के भी आँसू छलक जायें,
ये सजा मत दो प्यार मे कि हम दर्द की परिभाषा बन जायें,
युँ जला कर, गम दे कर, तडपा कर,
इतना मत इन्तजार करवाओ कि आँखें समय का पैमाना बन जायें |
………………………………….. Shubhashish(2000)
इन्तजार…
March 30, 2008 by Shubhashish Pandey
Posted in Shayari - Muqtak | Tagged इन्तजार, कला, कविता, मुक्तक, शुभाशीष, शेर | No Comments Yet
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