क्यों मेरी जिन्दगी को ऐसा बना दिया,
दुख के कफन में मुझे जिंदा जला दिया,
मोहब्बत के ख्वाब में हकीकत जल गयी,
सुकुन के ख्वाब मे सबकुछ गवां दिया|
क्या रात और क्या दिन सब एक ही से लगते हैं,
रोते-रोते तेरी याद में खुद खो भूला दिया,
बीते पल का हिसाब रखते हैं नये पल गम ही देते हैं,
बीते पल को ही खुद का नसीब बना दिया|
……………………………Shubhashish(2001)
क्यों ऐसा बना दिया
30 मार्च- टिप्पणियाँ Leave a Comment
- श्रेणी Shayari - Muqtak
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