क्यों ऐसा बना दिया
March 30, 2008 by Shubhashish Pandey
क्यों मेरी जिन्दगी को ऐसा बना दिया,
दुख के कफन में मुझे जिंदा जला दिया,
मोहब्बत के ख्वाब में हकीकत जल गयी,
सुकुन के ख्वाब मे सबकुछ गवां दिया|
क्या रात और क्या दिन सब एक ही से लगते हैं,
रोते-रोते तेरी याद में खुद खो भूला दिया,
बीते पल का हिसाब रखते हैं नये पल गम ही देते हैं,
बीते पल को ही खुद का नसीब बना दिया|
……………………………Shubhashish(2001)


