हर किसी को किसी की तलाश है,
हर कोई ढुंढता अपने लिए कोई खास है,
साफ नजर आ जायेगा जरा गौर से देखो,
शायद वो कहीं तुम्हारे ही आस-पास है |
………………………. Shubhashish(2003)
कोई खास
2 अप्रै- टिप्पणियाँ 1 टिप्पणी
- श्रेणी Shayari - Muqtak
One Response to “कोई खास”
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