ना तुम मेरी हो ना मेरी किस्मत मे तुम्हारा साथ है,
तुम मेरी हो नहीं सकती इस बात का भी मुझे एहसास है,
पर ये ना कहो कि तुम्हे पाने की कोशिश भी छोड दूँ,
मेरे जीने के लिए जरूरी तुम्हे पाने की आस है|
……………………………… Shubhashish(2004)
जीने के लिए जरूरी
April 3, 2008 by Shubhashish Pandey
Posted in Shayari - Muqtak | Tagged कला, कविता, मुक्तक, शुभाशीष, शेर, Shubhashish | 1 Comment
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‘ tum mairee na shee, fir bhee mujko thumahree hee pyass hai,
tum maire pass nahee, fir bhee thumahre aks ka hee ahesas hai,
ye na kho kee bhul jaun mai tumko…………………..
thumahree yad se hee chultee mairee hr ek sans hai…”
Regards