तु जीने की आखिरी आस है तुझे मै भूल कहाँ पाउंगा,
तु भी ना मीली तो शायद लाश ही बन जाउंगा,
ठुकराते हो तो ठुकरा दो पर एक बार जरूर सोच लेना,
अगर तुमने भी ठुकरा दिया तो फिर मैं कहाँ जाउंगा ?
…………………………………….. Shubhashish(2003)
ठुकरा दो पर एक बार सोच लेना
April 3, 2008 by Shubhashish Pandey
Posted in Shayari - Muqtak | Tagged कला, कविता, ठुकरा दो पर, मुक्तक, शुभाशीष, शेर, Shubhashish | 2 Comments
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