नदीयों की धाराओं को कैसे मोड दूँ,
पलको के ख्वाब को कैसे तोड दूँ,
तु मुझे चाहेगी, इतनी तो उम्मीद भी नही करता,
पर तुझे पाने की उम्मीद कैसे मैं छोड दूँ |
………………………….. Shubhashish(2003)
उम्मीद
3 अप्रै- टिप्पणियाँ 1 टिप्पणी
- श्रेणी Shayari - Muqtak
One Response to “उम्मीद”
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पर तुझे पाने की उम्मीद कैसे मैं छोड दूँ |