चाहत तुम्हे भी सताये तो खुद को मत रोकना,
बात कभी जुबाँ पे आ जाये तो खुद को मत रोकना,
कोई मुझसे अच्छा लगे तो हो जाओ उसकी लेकिन,
मुझसे ज्यादा कोई चाहेगा तुम्हे, ये ख्वाब मे भी मत सोचना|
……………………………. Shubhashish(2004)
Tags: कला, कविता, ख्वाब मे भी मत सोचना, मुक्तक, शुभाशीष, शेर, Shubhashish




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