क्या मुझे एक अच्छा कल नहीं दे सकते,
क्या मेरी उलझनो को हल नही दे सकते,
कुछ ज्यादा तो मांगता ही नहीं मै तुमसे,
पर क्या मायुस जिंदगी में खुशीयों के चंद पल नही दे सकते|
………………………… Shubhashish(2004)
खुशीयों के चंद पल
April 5, 2008 by Shubhashish Pandey
Posted in Shayari - Muqtak | Tagged कला, कविता, मुक्तक, शुभाशीष, शेर, Kavita, Sher, Shubhashish | 1 Comment
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bahut hi khub