अपने जज्बात छिपा पाना कितना मुश्किल होता है,
अपने हालात बता पाना कितना मुश्किल होता है,
कितना दर्द स उठता है जब लगता है तेरा प्यार नहीं मिल पायेगा,
फिर भी एक तरफा प्यार किये जाना कितना मुश्किल होता है|
………………………………. Shubhashish(2004)
कितना मुश्किल होता है
April 6, 2008 by Shubhashish Pandey
Posted in Shayari - Muqtak | Tagged कला, कविता, मुक्तक, शुभाशीष, शेर, Kavita, Sher, Shubhashish | 1 Comment
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