अपने जज्बात छिपा पाना कितना मुश्किल होता है,
अपने हालात बता पाना कितना मुश्किल होता है,
कितना दर्द स उठता है जब लगता है तेरा प्यार नहीं मिल पायेगा,
फिर भी एक तरफा प्यार किये जाना कितना मुश्किल होता है|
………………………………. Shubhashish(2004)
कितना मुश्किल होता है
April 6, 2008 by Shubhashish Pandey
Posted in Shayari - Muqtak | Tagged कला, कविता, मुक्तक, शुभाशीष, शेर, Kavita, Sher, Shubhashish | 1 Comment
One Response
Leave a Reply
-
Comming soon
Next -
जय जय हो reality show
-
Read in your own script
-
Recent Posts
-
Best 5 (Public View)
-
My All Posts
-
All rights reserved
©2008 All rights reserved.© सर्वाधिकार सुरक्षित
यहाँ प्रकाशित सभी रचनाओं के सर्वाधिकार लेखक के पास सुरक्षित हैं। लेखक की लिखित स्वीकृति के बिना इनके किसी भी अंश के पुनर्प्रकाशन की अनुमति नहीं है। -
Comment Please
आप का इस ब्लोग पर हार्दिक स्वागत है| आप के द्वारा इस ब्लोग का अवलोकन करना मेरे लिए सौभाग्य है और उसके प्रतिक्रिया स्वरुप आपके मस्तिष्क में उठने वाले विचार मेरी इस मेहनत का परिणाम| ये विचार जैसे भी हैं मेरे लिए पुरस्कार हैं| कृपया उचित टिप्पणी देकर मार्गदर्शन करें
धन्यवाद -
सांख्यिकी
- 35,946 hits
-
हाल की शीर्ष रचनायें
-
Recent Comments
KRISHAN KUMAR on बस एक ख्वाब हो तुम KRISHAN KUMAR on कैसा रिश्ता है .. ना बनता है न… Ravi chaurasia on जूली – A real story Ravi chaurasia on चरित्रहीन – The call… abhishek on तुम रहे जब तक abhishek on उम्मीद Ravi Malhan on चरित्रहीन – The call… नीरज बधवार on The back bencherz Ravindra on खुदा ये कैसा फैसला तेरा shiv on जिन्दा -
साहित्य जगत
Archives



Fine and Superb. Need to feel it.