जिदंगी खत्म होने को है पर जिया कुछ भी नहीं,
गम तो बहुत मिले पर खुशीयां कुछ भी नहीं,
फिर भी कोई शिकवा नहीं इस के सिवा जिंदगी से,
वो तो हमारे सबकुछ हो गये पर हम उनके कुछ भी नहीं|
…………………………………….. Shubhashish(2004)
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बढ़िया है
bahut khub
badhiya