देख के भी तुने कितनी बार अनदेखा किया,
पर दिल आखों मे आंसू भर के भी मुस्कूराया है,
तेरी चाहत मे खुद की नज़रों से गिर गये पर,
तुझे हमेशा अपनी पलकों पर बिठाया है,
मेरे ज़ज़्बात भी मेरे दिल को कचोटते है,
पर तुझे मेरे दिल कि परवाह कहाँ,
कभी अपना दोस्त भी ना समझा तुने,
पर हमने हर बार अपना फर्ज निभाया है|
…………………………. Shubhashish(2004)
तुने अनदेखा किया
April 8, 2008 by Shubhashish Pandey
Posted in Shayari - Muqtak | Tagged कला, कविता, तुने अनदेखा किया, मुक्तक, शुभाशीष, शेर, Kavita, Sher, Shubhashish | 3 Comments
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main to aisa pyar nhi kr skti
achchhi kvita likhi.aapki ek narajgi dur krne ke liye maine kuchh likha hai.sanchika(sanchika.blogspot.com) me dekh lijiyega..
wah kya baat hai bahut badhiya.
achchee koshish hai