तुमसे मिल के खुशी का कोई ठिकाना नहीं होता,
तेरे दिल के सिवा मेरा कहीं आशियानां नहीं होता,
ये दुबारा मिलना कि उम्मीद है जो मुझे जिन्दा रखती है,
वरना तुझसे बिछड के जीने का कोई बहाना नहीं होता|
……………………………………. Shubhashish(2004)
Tags: कला, कविता, मुक्तक, शायरी, शुभाशीष, शेर, Kavita, muqtak, shayari, Sher, Shubhashish




wah bahut khub
तुमसे मिल के खुशी का कोई ठिकाना नहीं होता,
तेरे दिल के सिवा मेरा कहीं आशियानां नहीं होता,
ये दुबारा मिलना कि उम्मीद है जो मुझे जिन्दा रखती है,
वरना तुझसे बिछड के जीने का कोई बहाना नहीं होता|
blog pe aane ke liye dhanyavad dolly ji.