जीने का बहाना
April 10, 2008 by Shubhashish Pandey
तुमसे मिल के खुशी का कोई ठिकाना नहीं होता,
तेरे दिल के सिवा मेरा कहीं आशियानां नहीं होता,
ये दुबारा मिलना कि उम्मीद है जो मुझे जिन्दा रखती है,
वरना तुझसे बिछड के जीने का कोई बहाना नहीं होता|
……………………………………. Shubhashish(2004)



wah bahut khub
तुमसे मिल के खुशी का कोई ठिकाना नहीं होता,
तेरे दिल के सिवा मेरा कहीं आशियानां नहीं होता,
ये दुबारा मिलना कि उम्मीद है जो मुझे जिन्दा रखती है,
वरना तुझसे बिछड के जीने का कोई बहाना नहीं होता|
blog pe aane ke liye dhanyavad dolly ji.