इस कदर चाहा है तुझ कि खुद प्यार से महरूम हो गये,
तुम्हारे पास आने के लिये हम खुद से दूर हो गये,
पूछते हो कि आज हम खामोश क्यों हैं कुछ बोलते क्यों नहीं ?
क्या करें, तेरी ठोकरों से टूट के हम चूर-चूर हो गये|
………………………………Shubhashish(2004)
हाँ, अब हम खामोश हैं…..
April 11, 2008 by Shubhashish Pandey
Posted in Shayari - Muqtak | Tagged अब हम खामोश हैं, कला, कविता, मुक्तक, शायरी, शुभाशीष, शेर, हाँ, Kavita, muqtak, shayari, Shayari - Muqtak, Sher, Shubhashish | 2 Comments
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वाह वाह वाह… क्या कहा है…।
‘kash iss kadard tut kr hr pal thuje chaha na hotta,
kash thuje pane ka sapna apne dil mey bsaya na hotta,
kya kren taire mohbaat mey itne majbur ho gye jalim ,
verna taire khusee ke liye aapna aaseeyan khud jlaya na hotta”