गर आँसू तेरी आँख का होता,
गिरता गाल को चुमते हुए,
फिर गिर के तेरे होठों पर,
फना हो जाता वहीं हॅसते हुए,
पर
जो तुम होती मेरी आँख का आसु,
भले गुजरती उम्र गम सह-सह कर,
तुझे खो ना दूं कही इस डर से,
मै ना रोता ज़िदगी भर|
………………. Shubhashish(2004)
गर आँसू तेरी आँख का होता
April 12, 2008 by Shubhashish Pandey
Posted in Shayari - Muqtak | Tagged aansoo, कला, कविता, मुक्तक, शायरी, शुभाशीष, शेर, हाँ, Kavita, muqtak, shayari, Shayari - Muqtak, Sher, Shubhashish | 3 Comments
3 Responses
Leave a Reply
-
Comming soon
Next -
जय जय हो reality show
-
Read in your own script
-
Recent Posts
-
Best 5 (Public View)
-
My All Posts
-
All rights reserved
©2008 All rights reserved.© सर्वाधिकार सुरक्षित
यहाँ प्रकाशित सभी रचनाओं के सर्वाधिकार लेखक के पास सुरक्षित हैं। लेखक की लिखित स्वीकृति के बिना इनके किसी भी अंश के पुनर्प्रकाशन की अनुमति नहीं है। -
Comment Please
आप का इस ब्लोग पर हार्दिक स्वागत है| आप के द्वारा इस ब्लोग का अवलोकन करना मेरे लिए सौभाग्य है और उसके प्रतिक्रिया स्वरुप आपके मस्तिष्क में उठने वाले विचार मेरी इस मेहनत का परिणाम| ये विचार जैसे भी हैं मेरे लिए पुरस्कार हैं| कृपया उचित टिप्पणी देकर मार्गदर्शन करें
धन्यवाद -
सांख्यिकी
- 35,634 hits
-
हाल की शीर्ष रचनायें
-
Recent Comments
Ravi chaurasia on जूली – A real story Ravi chaurasia on चरित्रहीन – The call… abhishek on तुम रहे जब तक abhishek on उम्मीद Ravi Malhan on चरित्रहीन – The call… नीरज बधवार on The back bencherz Ravindra on खुदा ये कैसा फैसला तेरा shiv on जिन्दा shiv on रात भर Jitendra Singh Chauh… on कभी अकेला नही छोडा -
साहित्य जगत
Archives



बाह क्या बात है.
simply awesome bahut bahut khubsurat.
bahut badhiya…….