तुम्हारे लिए मेरी हर सांस गम उठाएगी,
तुम्हारे लिए ये जिंदगी भी बर्बाद हो जायेगी,
आजमाना हो तो बोलो खुद को खाक कर के दिखा दूं,
तुम्हारे नाम की आवाज़ तो मेरे खाक से भी आएगी |
……………………………. Shubhashish(2004)
आजमाना हो तो बोलो
April 21, 2008 by Shubhashish Pandey
Posted in Shayari - Muqtak | Tagged कला, कविता, खुदा ये कैसा फैसला, मुक्तक, शायरी, शुभाशीष, शेर, Kavita, muqtak, shayari, Shayari - Muqtak, Sher, Shubhashish | 4 Comments
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‘ iss dil ko dukhana ho too bolo,
mairee ruh ko tadpana ho to bolo,
taire bin mai kuch bhee nahee jamney mey,
maire lash ka bojh udhana ho too boo…..”
bahut badhiya aakhari do panktiyan bahut lajawab
तुम्हारी आवाज़ मेरी खाक में से आयेगी बहुत सुंदर अभिव्यक्ति है “” वहाँ पहुच के ये कहना सवा {हवा } सलाम दे बाद ,तुम्हारे नाम की रट है खुदा के नाम के बाद “
seema ji , mehek ji aur brijmohan ji aap sabhi logo ko dhanyavd