मौसम

 …Unfortunately a true Love story

 

अजीब सी खामोशी के साथ धीमी बरसात है
शायद आज फिर से एक लम्बी रात है
निहारती हैं एक टक आँखे बाहर के मौसम को,
फिर से याद आ रही किसी मौसम की हर बात है

वो सुरूर मोहब्बत का, वो आँखों की प्यास
वो बेताब धड़कने, वो मिलने की आस
वो तन्हाईयों में अक्सर उनकी तस्वीर से बातें,
उनसे आँखे टकराने पर वो अजीब सा एहसास

उनके खयालो से मेरा दिल महकता था हर पल
उनके दिखने से मेरे खुशियों में होती थी हलचल
एक झलक के लिए पागल हम कोई अकेले नहीं थे
देख के मौसम को मौसम भी हो जाता था चंचल

जिंदगी खुश थी और मौसम खुशगवार था
पर शायद इतनी खुशियों से वक़्त को इंकार था
जाने क्या सोच कर ठुकरा दिया मौसम ने मुझे
मेरे सामने तो बस सवालों का अंबार था

मौसम में कई नए फूल खिलने लगे थे
जैसे तैसे हम अपने ज़ख्म सिलने लगे थे
अब मौसम के दिल का कुमार कोई और था
कई सवालों के जवाब भी हमे मिलने लगे थे

खैर!!
अब बहुत दूर हो चुके हैं अपनी जिंदगी के रास्ते
शायद दर्द भी ढल जाये यूँ ही आस्ते आस्ते
जाने क्यूँ समझ नहीं पाया इस छोटी सी बात को
अरे! मौसम तो होता ही है बदलने के वास्ते …
…………………………… Shubhashish(2005)

5 Responses to “मौसम”

  1. mehek Says:

    in one word behtarin geet,ya kavita ya nazm jo bhi,bahut bahut khubsurat.

  2. समीर लाल Says:

    बहुत बेहतरीन!! वाह!!

  3. shubhashishpandey Says:

    dhanyavad mehek ji aur sameer ji :)

  4. sharad Says:

    wah wah shubhashishji kya likha hai aapne
    bus ek request hai aapse zara hindi ka kuch kijiye thik se nahi padne mei aate akshar, isliye thodi kasak rah jaati hai bolne mei ki-
    wah ustad kya likha hai aapne
    hum to aapke kayal ho jaate hai
    jo bhi likha ho aapne.

  5. Shubhashish Pandey Says:

    dhanyvad sharad ji ,
    mere khayal se aap IE7 ya IE8 browser proyog nahin kar rahe hain, Mozila me hindi font ki rendering bahut khrab hai is lye shabd spasht nahin dikhte :)
    Baki aap ke sabhi tippadiyon(comments) ke liye bahut bahut dhanyvad

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