इम्तेहां हो गई

मोहब्बत की मेरे इम्तेहां हो गई,
सारी बातें खत्म बस यहां हो गई,
क्या से क्या हो गये जिनकी खातिर,
बातें अब ये उनके लिये बचपना हो गयीं|
……………………………. Shubhashish(2005)

3 Responses to “इम्तेहां हो गई”

  1. lovely kumari Says:

    बहुत गुस्सा लगता है बंधू क्या किया जा सकता है मुहब्बत चीज ही ऐसी है :-)

  2. राजीव रंजन प्रसाद Says:

    क्या से क्या हो गये जिनकी खातिर,
    बातें अब ये उनके लिये बचपना हो गयीं

    सोलह आने सत्य..

    ***राजीव रंजन प्रसाद
    http://www.rajeevnhpc.blogspot.com

  3. Shubhashish Pandey Says:

    lovely ji aur rajiv ji aap logo ko bahut bahut dhanyvad.

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