एतबार की जरुरत किसको नहीं होती,
एक यार की जरुरत किसको नहीं होती,
मिलता नहीं कोइ हमसफर साथ निभाने के लिये,
वरना प्यार की जरुरत किसको नहीं होती|
…………………………. Shubhashish(2005)
जरुरत किसको नहीं होती
May 8, 2008 by Shubhashish Pandey
Posted in Shayari - Muqtak | Tagged कला, कविता, मुक्तक, शायरी, शुभाशीष, शेर, Kavita, muqtak, shayari, Shayari - Muqtak, Sher, Shubhashish | 3 Comments
3 Responses
Leave a Reply
-
Comming soon
Next -
जय जय हो reality show
-
Read in your own script
-
Recent Posts
-
Best 5 (Public View)
-
My All Posts
-
All rights reserved
©2008 All rights reserved.© सर्वाधिकार सुरक्षित
यहाँ प्रकाशित सभी रचनाओं के सर्वाधिकार लेखक के पास सुरक्षित हैं। लेखक की लिखित स्वीकृति के बिना इनके किसी भी अंश के पुनर्प्रकाशन की अनुमति नहीं है। -
Comment Please
आप का इस ब्लोग पर हार्दिक स्वागत है| आप के द्वारा इस ब्लोग का अवलोकन करना मेरे लिए सौभाग्य है और उसके प्रतिक्रिया स्वरुप आपके मस्तिष्क में उठने वाले विचार मेरी इस मेहनत का परिणाम| ये विचार जैसे भी हैं मेरे लिए पुरस्कार हैं| कृपया उचित टिप्पणी देकर मार्गदर्शन करें
धन्यवाद -
सांख्यिकी
- 35,500 hits
-
हाल की शीर्ष रचनायें
-
Recent Comments
Ravi Malhan on चरित्रहीन – The call… नीरज बधवार on The back bencherz Ravindra on खुदा ये कैसा फैसला तेरा shiv on जिन्दा shiv on रात भर Jitendra Singh Chauh… on कभी अकेला नही छोडा yogesh verma on The back bencherz Shubhashish Pandey on थोडा रोने के बाद Shubhashish Pandey on प्यार सामने होता है Shubhashish Pandey on The back bencherz -
साहित्य जगत
Archives



मिलता नहीं कोइ हमसफर साथ निभाने के लिये,
वरना प्यार की जरुरत किसको नहीं होती|
सही है..
***राजीव रंजन प्रसाद
“ek baar mujhpe aitbaar kiya to hotta,
ek baar dil se ikraar kiya to hottaa,
todh daitey hum hr rsamo reevaj ko,
ek baar mujhse saccha pyar kiya to hotta….”
“beautifully composed, good one”
rajeev ji aur seema ji is hausla-afzayi ke liye aap logo ka bahut bahut shukriya