सच कहू तो बस एक ख्वाब हो तुम,
दोस्ती नही की तुम से कुछ पाने के लिए,
अपनी बातों से बस तुम्हे हॅसाना चाहता हूँ,
क्यूंकि वजह कम है मेरे पास मुस्कुराने के लिये,
ना समझना मुझे परवाना अपनी लौ का,
तुझमें जलने कि मुझको कोई ख्वाहिस नही है,
मैं तो जलके पहले ही आफताब हो गया हूँ,
तेरी दुनियाँ में आया हूं बस जगमगाने के लिये|
………………………… Shubhashish
बस एक ख्वाब हो तुम
May 14, 2008 by Shubhashish Pandey
Posted in Shayari - Muqtak | Tagged कला, कविता, मुक्तक, शायरी, शुभाशीष, शेर, Kavita, muqtak, shayari, Shayari - Muqtak, Sher, Shubhashish | 7 Comments
7 Responses
Leave a Reply
Frundu.com – Easiest And Fastest Collage Maker
Easiest Collage maker.
just try it once
Frundu.com Read in your own script
-
Recent Posts
Best 5 (Public View)
My All Posts
All rights reserved
©2008 All rights reserved.© सर्वाधिकार सुरक्षित
यहाँ प्रकाशित सभी रचनाओं के सर्वाधिकार लेखक के पास सुरक्षित हैं। लेखक की लिखित स्वीकृति के बिना इनके किसी भी अंश के पुनर्प्रकाशन की अनुमति नहीं है।Comment Please
आप का इस ब्लोग पर हार्दिक स्वागत है| आप के द्वारा इस ब्लोग का अवलोकन करना मेरे लिए सौभाग्य है और उसके प्रतिक्रिया स्वरुप आपके मस्तिष्क में उठने वाले विचार मेरी इस मेहनत का परिणाम| ये विचार जैसे भी हैं मेरे लिए पुरस्कार हैं| कृपया उचित टिप्पणी देकर मार्गदर्शन करें
धन्यवाद-
सांख्यिकी
- 44,265 hits
-
हाल की शीर्ष रचनायें
-
Recent Comments
Swapna Manjusha 'ada… on ये रोग जिसे लग जाये Shubhashish Pandey on In Rising India ???? Shubhashish Pandey on थोडा रोने के बाद Shubhashish Pandey on रात भर jimmy on थोडा रोने के बाद payal on रात भर payal on रात भर Kumar on ये रोग जिसे लग जाये Anushree on In Rising India ???? Shubhashish Pandey on ये रोग जिसे लग जाये साहित्य जगत
Archives



बढ़िया है.
तो जलके पहले ही आफताब हो गया हूँ,
तेरी दुनियाँ में आया हूं बस जगमगाने के लिये|
kya bat hai…
dhanyavad sameer ji dhanyavad anurag ji
लब पे आती है दुआ बनके तमन्ना मेरी
जिन्दगी शम्मा की सुरत हो ख़ुदाया मेरी
दूर दुनिया का मेरे दम अँधेरा हो जाए
हर जगह मेरे चमकने से उजाला हो जाये
Lage raho….
in panktiyon ke liye bahut bahut dhnyavad niyamak ji
Riyali you great
your fen (M.H)
DOST tarif ke liye mere pas SABD HI NAHi HAI