बस एक ख्वाब हो तुम
May 14, 2008 by Shubhashish Pandey
सच कहू तो बस एक ख्वाब हो तुम,
दोस्ती नही की तुम से कुछ पाने के लिए,
अपनी बातों से बस तुम्हे हॅसाना चाहता हूँ,
क्यूंकि वजह कम है मेरे पास मुस्कुराने के लिये,
ना समझना मुझे परवाना अपनी लौ का,
तुझमें जलने कि मुझको कोई ख्वाहिस नही है,
मैं तो जलके पहले ही आफताब हो गया हूँ,
तेरी दुनियाँ में आया हूं बस जगमगाने के लिये|
………………………… Shubhashish



बढ़िया है.
तो जलके पहले ही आफताब हो गया हूँ,
तेरी दुनियाँ में आया हूं बस जगमगाने के लिये|
kya bat hai…
dhanyavad sameer ji dhanyavad anurag ji
लब पे आती है दुआ बनके तमन्ना मेरी
जिन्दगी शम्मा की सुरत हो ख़ुदाया मेरी
दूर दुनिया का मेरे दम अँधेरा हो जाए
हर जगह मेरे चमकने से उजाला हो जाये
Lage raho….
in panktiyon ke liye bahut bahut dhnyavad niyamak ji