जब गम तेरा देख के दिल मुझसे नही सम्भलता है
तो तेरी खुशियों की खातिर ये यूं ही दिन रात जलता है
ऐसे तो सुनता ही नही खुदा दुआ हमारी अक्सर
पर शायद कभी-कभी हमारे आँसुवों से वो भी पिघलता है
…………………………………… Shubhashish(2007)
खुदा भी पिघलता है
May 29, 2008 by Shubhashish Pandey
Posted in Shayari - Muqtak | Tagged कला, कविता, मुक्तक, शायरी, शुभाशीष, शेर, Kavita, muqtak, shayari, Shayari - Muqtak, Sher, Shubhashish | 14 Comments
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ऐसे तो सुनता ही नही खुदा दुआ हमारी अक्सर
पर शायद कभी-कभी हमारे आँसुवों से वो भी पिघलता है
वाह!!!
***राजीव रंजन प्रसाद
Realy nice shayari. Good going
” baat jb dil se niklee to jmaney mey mshuur ho gye,
dua jb aansuon mey piglee to vo bhee kbul ho gyee…..”
wah wah wah good combination of thoughts with words”
keep it up
जब गम तेरा देख के दिल मुझसे नही सम्भलता है
तो तेरी खुशियों की खातिर ये यूं ही दिन रात जलता है
अच्छा लिखा है।
बहुत सुंदर.
आपने बहुत उम्दा और भावपूर्ण लाइनें लिखी
ऐसे तो सुनता ही नही खुदा दुआ हमारी अक्सर
पर शायद कभी-कभी हमारे आँसुवों से वो भी पिघलता है
बहुत सुंदर
बढ़िया.
डा. रमा द्विवेदी
बहुत खूब…वाह वाह… मज़ा आ गया
Rajiv ji, Amjad ji , Seema ji, Shobha ji, Ranjana ji,Bal-kishan ji,Sameer ji aur Dr. Rama Dwivedi ji aap sabhi logo ka is hausla-afzayi ke liye tah-e dil se shukriya
well don
keep it aLWAYS
bahut bahut shukriya ashok ji
again excelent kya mai ye copy kar sakta hoo sirji.
realy great.
very nice.
thx
kai baat hai bahi
tum kamlho yar
dhanayavad Haryanvi ji