Archive | अगस्त, 2008

कैसा रिश्ता है .. ना बनता है ना बिखरता है

27 अग

1)
अक्सर कुछ उदास हो एक मोड़ पे आ ठहरता है,
जाने कौन सा रिश्ता है ये .. ना बनता है ना बिखरता है !

2)
मैं तुम्हे समझा नहीं या तुम मुझे समझे नहीं,
बात इतनी ही है शायद, की हम कभी बदले नहीं !

………………. Shubhashish

गर मेरे इश्क का पता तेरी यादों को लग जाये

6 अग

दर्द कितना हो पर आंखे आसूवों को रोने नहीं देतीं
मेरी बेखुदी मेरे इश्क की खबर तेरी यादों को भी नहीं होने देतीं
गर मेरे इश्क का पता तेरी यादों को लग जाये तो परेशान हो जाये तू
क्युकी फिर ये हिचकियाँ रात भर तुझे सोने नहीं देतीं
……………………………….. Shubhashish

चार पंक्तियाँ दोस्तों के लिए

4 अग

चाह के भी जिससे कोई राज छुपाया नहीं जाता है
कभी हँसाता कभी रुलाता पर हर पल साथ निभाता है
खून का तो नहीं पर कभी – कभी हो जाता है उससे भी गहरा
ये प्यारा रिश्ता ही तो दोस्ती कहलाता है
………………………. Shubhashish

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