चाह के भी जिससे कोई राज छुपाया नहीं जाता है
कभी हँसाता कभी रुलाता पर हर पल साथ निभाता है
खून का तो नहीं पर कभी – कभी हो जाता है उससे भी गहरा
ये प्यारा रिश्ता ही तो दोस्ती कहलाता है
………………………. Shubhashish
चार पंक्तियाँ दोस्तों के लिए
August 4, 2008 by Shubhashish Pandey
Posted in Shayari - Muqtak | Tagged कला, कविता, दोस्ती, मुक्तक, शायरी, शुभाशीष, शेर, dosti, Kavita, muqtak, shayari, Shayari - Muqtak, Sher, Shubhashish | 10 Comments
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सही कहा है।
घुघूती बासूती
बहुत खूब!! सही है.
Ghughuti Basuti ji aur sameer ji is hausala-afzayi ke liye shukriya
MAI to aapka kaail ho gaya. jazbato ko kagaj sorry screen pe ukerne ki kala har kisi ko hasil nahi hoti .. you got GOD GIFT. CONGRATULATIONS !
डा. रमा द्विवेदी…….
बहुत खूब लिखा है आपने…शुभकामनायें….
aap ko ye panktiyan achhi lagi bahut bahut shukriya amrish ji.
Dr. Rama Dwivedi ji aap ka abhar.
इस में ना स्वार्थ है ना ही कोइ मतलब है।
ये तो निस्वार्थ है रिश्तों से कइं उपर है।
इस में ना भेद है धर्मों का या मज़हब का कहीं।
इसीलिये तो ये दोस्ती कहलाता है।
हमारे छोटे से शुभाशिश को बडी-बडी शुभकामनाऎ
in panktiyon ke liye dhanyavad raziya ji
kamal hai yar
dhanyavad Haryanvi ji