दर्द कितना हो पर आंखे आसूवों को रोने नहीं देतीं
मेरी बेखुदी मेरे इश्क की खबर तेरी यादों को भी नहीं होने देतीं
गर मेरे इश्क का पता तेरी यादों को लग जाये तो परेशान हो जाये तू
क्युकी फिर ये हिचकियाँ रात भर तुझे सोने नहीं देतीं
……………………………….. Shubhashish
गर मेरे इश्क का पता तेरी यादों को लग जाये
August 6, 2008 by Shubhashish Pandey
Posted in Shayari - Muqtak | Tagged कला, कविता, दोस्ती, मुक्तक, शायरी, शुभाशीष, शेर, dosti, Kavita, muqtak, shayari, Shayari - Muqtak, Sher, Shubhashish | 6 Comments
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बहुत उम्दा…वाह!
bahut achchi….
bahut sundar….
behatarin
sameer ji vipin ji in utsahwardhak shbdon ke liye aabhar
Wakai main kya likhtey ho ……….
man gaye janaab aapko….
Sagar ki jo gehrayia in panktiyo main jhalak rahi hain….
Aansuo palko par machalte kyon ho, khofe ruswai hai to ghar se nikalte kyon ho……
kya baat hai amrish ji ,sunder