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Archive for the ‘Kavita’ Category

ऐसा नहीं की अब सब कुछ बदल गया
पर हाँ हमने खुद को जरुर बदल डाला है
कुछ हासिल नहीं होता छटपटाने से
सो खुद से ही खुद को संभाला है
ऐसा नहीं की अब आग बुझ चुकी है
वो तो आज भी सुलगती है किसी कोने में
हाथ से खोजते थे उसमे जाने क्या खोया हुआ
और ये हाथ अक्सर तब [...]

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In Rising India ????

रोज बढ़ते हुए sensex के ज्वार में
हम भी खोये थे Rising India के खुमार में
आने वाले टाइम में इंडिया दुनिया में छा जाएगा
चीन, जापान, अमेरिका हर कोई बस मुह देखता रह जायेगा
कुछ इन्ही बातों पे कार के अंदर बहस छीड़ी थी
किसे परवाह की ट्रैफिक सिग्नल पे कितनी भीड़ खड़ी थी
तभी किसी ने कार के शीशे [...]

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समझ नहीं आता की क्या कर डालूँ मैं
तुम्हें बदलने की कोशिश करूं या खुद को बदल डालूँ मैं
अब और यही दर्द नहीं सहा जाता मुझसे
दम तोड़ने दूं या खुद को संभालूँ मैं
जाने कब से बरसने को तरसते हैं बादल
रोकूँ उन्हें या अपना दामन भीगा डालूँ मैं
जीने नहीं देती, पर तेरी यही एक निशानी बाकी [...]

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यौवन के मद में अनियंत्रित, सागर में खो जाने को
आज चला था पैसो से मैं यौवन का सुख पाने को
दिल की धड़कन भी थिरक रही थी यौवन के मोहक बाजे पे
अरमानों के साथ मैं पंहुचा उस तड़ीता के दरवाजे पे
अंदर पंहुचा तो मानो हया ने भी मुँह फेर लिया
चारो तरफ से मुझको यूँ रुपसियों ने [...]

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(अपने बी.टेक. फाइनल इयर में जब मैंने ये कविता लिखी थी उस वक़्त unicode जैसी सहूलियत नहीं थी इसलिए मेरे दोस्त कुमार वरुण, जो की इस कविता के प्रेरणा भी थे (क्युकी वो कभी कभी बोलता की यार मैं इमरान हाश्मी बनना चाहता हूँ ) ने इसे हिंदी पैड पे लिख के jpeg [...]

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