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Easiest Collage maker.
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Frundu.com | यूँ हीं… |
| …..खोना |
| मैगी – The Bachelor’s Lifeline |
| खुशनसीब …… या बदनसीब…. |
| ख्वाहिश |
| सुकून |
| नेता बनाम आम आदमी |
| बला का नाम है बीवी |
| ऐसा था मेरा बचपन |
| सवाल…. |
| बरसात |
| मर्यादा और प्रेम |
| किसी ने अल्लाह कह के मारा किसी ने राम कह के मारा |
| ये रोग जिसे लग जाये |
| The back bencherz |
| थोडा रोने के बाद |
| नमन |
| कैसा रिश्ता है .. ना बनता है ना बिखरता है |
| गर मेरे इश्क का पता तेरी यादों को लग जाये |
| चार पंक्तियाँ दोस्तों के लिए |
| कोशिश कर के हार गए |
| इश्क ने यहाँ कितनों को कोई और मुकद्दर दिया |
| इश्क भी क्या चीज़ है |
| किसी कोने में |
| रात भर |
| In Rising India ???? |
| निशानी |
| एहसास नहीं रह जाता |
| खुदा भी पिघलता है |
| चरित्रहीन - The call girl |
| कोशिश न करना कीमत .. |
| गहरा समन्दर है |
| कुछ आदतें नहीं बदलतीं |
| बस एक ख्वाब हो तुम |
| मैं इमरान हाशमी बनना चाहता हूँ |
| माँ |
| इतनी गैरत नहीं |
| करते थे बातें इशारों पे जान देने की |
| जरुरत किसको नहीं होती |
| इम्तेहां हो गई |
| कभी अकेला नही छोडा |
| कभी लडखडा के तो देख |
| मौसम …Unfortunately a true Love story |
| प्यार सामने होता है |
| बड़ा अजीब सा है वो |
| रुक्सत |
| कल फिर |
| तुम रहे जब तक |
| फोर्थ इयर में आ के |
| तेरे लिये मिट जायें |
| पा लिया है सब कुछ |
| आजमाना हो तो बोलो |
| हालात |
| खुदा ये कैसा फैसला तेरा |
| तुझे भूल नहीं पायेंगे |
| कभी सोचा नहीं था |
| जो राह दिखाइ है तुने |
| जूली - A real story |
| गर आँसू तेरी आँख का होता |
| हाँ, अब हम खामोश हैं….. |
| भटकाव - The Dilemma |
| जीने का बहाना |
| तेरा नाम दिल मे |
| ख़ुशी |
| इससे ज्यादा प्यार ? |
| तुने अनदेखा किया |
| शिकवा नहीं इस के सिवा |
| ये सेंसेक्स (हास्य व्यंग) |
| झा बाबू B-TECH-2 |
| कितना मुश्किल होता है |
| खुशीयों के चंद पल |
| क्यों सोचता हूँ मै |
| झा बाबू B.Tech |
| ख्वाब मे भी मत सोचना |
| मैं जानता नहीं |
| जीने के लिए जरूरी |
| उम्मीद |
| ठुकरा दो पर एक बार सोच लेना |
| जागो |
| कोई खास |
| इजहार नहीं कर सकता ? |
| सपनो पे जिंदगी |
| आसुओं से बरसते हैं जज्बात |
| जिन्दा |
| ख्वाब और हकीकत |
| हर बार |
| सीख लेते हैं लोग |
| क्यों ऐसा बना दिया |
| इन्तजार… |
| गर था ले रहा तु इम्तेहा |
| हमारा मुकद्दर |
| मुझे तेरी जरूरत है |
| आसुओं सगं गुजरती रात |
| कभी महाबली खली तो कभी ... |
| मजबूरीयों में बधे |
| कौन समझाये |
| भीगी आँखें |
| नजराना |
| तुझे पाने कि तमन्ना |
| कुछ मजबूरीयाँ |
| गुमसुम सी तनहाइयों मे |
| चांद की जगह तेरा चेहरा |
| पुकारा तो साथ दे देगे |
| बेताब धडकन |
| सपना क्यों |
| वक्त पर एहसान |
| नजदीकी का एहसास |
| Avinash maurya on चरित्रहीन – The call… | |
| anand khanwalkar on इजहार नहीं कर सकता ? | |
| deependra yadav on यूँ हीं…. (2) | |
| anand khanwalkar on नेता बनाम आम आदमी | |
| Ashish vishwatma on चरित्रहीन – The call… | |
| diwyansh on यूँ हीं…. (2) | |
| pyarelal on चरित्रहीन – The call… | |
| Padm Singh पद्म सिंह on यूँ हीं…. (2) | |
| प्रवीण पाण्डेय on यूँ हीं…. (2) | |
| Shubhashish Pandey '… on सुकून |
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chahat hume bhi sataye to khud ko mat rokna. bhat juba par aai to khud ko mat rokna. koi mujh se achchha lage to ho jane uske. par m ujh se jyada koi chahe ye khawo me mat sochna