झा बाबू B-TECH-2nd PART(हास्य कविता)

6 अप्रैल

second year में आके एक दिन झा जी निकले घूमने,
ऊँची-ऊँची बिल्डिंग देख लगे चक्कर खा के झूमने|

ऐसी ही एक ऊँची बिल्डिंग को देख रहे थे गौर से,
पास आकर एक आदमी ने माँगा किराया 4 रुपये पर फ्लोर के|

बताया ये दिल्ली है हर मंजिल देखने का किराया है,
12 रुपये दिए झा ने, कहा बस तीसरा flore ही नजर आया है|

दिल्ली घूम के रूम पे पहुंचे room partner  को कथा सुनाये,
कहा देख रहा था तेरहवी आज रुपये चालीस बचाए|

room partner ने हाथ जोड़कर दिल से बोला “मान गए यार,
आप जैसे बूधिमान को तो मिलना चाहिए पुरस्कार”|

ऐसी कहानी सुनकर कोई भी अपनी हसी नहीं रोक पाया,
अगले दिन कॉलेज मैं यही किस्सा रहा छाया|

झा बाबू B.Tech-1 पढ़ने के लिए इसपे click करें  

…………………………………… Shubhashish

 

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