जीने का बहाना

10 अप्रैल

तुमसे मिल के खुशी का कोई ठिकाना नहीं होता,
तेरे दिल के सिवा मेरा कहीं आशियानां नहीं होता,
ये दुबारा मिलना कि उम्मीद है जो मुझे जिन्दा रखती है,
वरना तुझसे बिछड के जीने का कोई बहाना नहीं होता|
……………………………………. Shubhashish(2004)

5 Responses to “जीने का बहाना”

  1. mehek अप्रैल 10, 2008 at 11:02 पूर्वाह्न #

    wah bahut khub

  2. dolly जुलाई 16, 2008 at 4:52 अपराह्न #

    तुमसे मिल के खुशी का कोई ठिकाना नहीं होता,
    तेरे दिल के सिवा मेरा कहीं आशियानां नहीं होता,
    ये दुबारा मिलना कि उम्मीद है जो मुझे जिन्दा रखती है,
    वरना तुझसे बिछड के जीने का कोई बहाना नहीं होता|

  3. Shubhashish Pandey जुलाई 17, 2008 at 9:09 पूर्वाह्न #

    blog pe aane ke liye dhanyavad dolly ji.

  4. Manjeet singh जुलाई 16, 2012 at 6:34 अपराह्न #

    u r a Gret Poet

  5. Shubhashish Pandey 'Aalsi' सितम्बर 4, 2013 at 2:21 अपराह्न #

    shukriya manjeet singh ji

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