जूली – A real story

12 अप्रैल

जमाने के सितम ने कर दिया बहुत बुरा हाल है,
इंजीनियरिंग कॉलेज में जूली का ये चौथा साल है,

यूँ तो क्लास में टीचर एंट्री देते नहीं इसे,
पर २-३ क्लास करके जूली ने मचाया काफी बवाल है,

कहाँ साल भर प्रिप्रेशन करने के बाद लड़के एडमिशन लेने आते हैं,
और फिर रहने के लिए हॉस्टल का एक ट्रीपल सीटर रूम पाते हैं,

पर जूली तो बचपन से ही हॉस्टल में अपनी मनमानी चलायी है,
किसी ट्रिपल सीटर में दिन तो सिंगल सीटर में रातें बिताई है,

वार्डेन महीनों में कभी चेक करे ये बड़ी बात हैं,
पर जूली कमरों में झांकती हर रात हैं,

दरवाजा बंद है तो अगले पे जाती है,
गर खुला मिल जाये तो बिस्तर पे आराम फरमाती है,

इतना ही नहीं जूली ने और भी कई गुल खिलाये हैं,
चंगु-मंगू नाम के दो बच्चे अपने गुलशन में उगाये हैं,

पर आजकल जूली घूमती तन्हा अकेली है,
उसके बच्चो का पिता कौन है ये अबुझ पहेली है,

हमारे पड़ोस वाले गुप्ता जी नशे में मस्त रहते हैं,
इनकी बक-बक से पूरे हॉस्टलवासी त्रस्त रहते हैं,

उस रात जूली उनके कमरे में सोई थी,
अपने टाइगर के खयालो में जाने कहाँ खोई थी,

इतने में गुप्ता जी नशे में अन्दर आये,
और जूली की बाहों में बिस्तर पर रात बिताये,

सुबह जब आँखे खुली तो गलती का एहसास था,
तन्हाई के सिवा अब कुछ नहीं जूली के पास था,

तब से वो पतला कुत्ता टाइगर भी साथ नहीं रहता है,
वो भी ज़माने की तरह जूली को बेवफा कहता है,

“अरे माफ़ कीजीयेगा…. जूली का परिचय देना तो भूल गया”

यूँ तो AKGEC के ब्वायेस हॉस्टल में इसे किसी परिचय की जरुरत नहीं,
पर जूली नाम की ये आवारा कुतिया जरा भी खूबसूरत नहीं ,

पर जूली का हॉस्टल से प्यार देखते हे बनता है,
साल में कई मौको पे इसका का बैर्थ-डे मानता है,

दर-असल जब भी जूली किसी का बर्थ-डे के खा जाती है ,
तो बर्थडे बॉय की बर्थडे बमप्स में लातें भी पाती है,

अरे एक बार तो मेरे आँखों के सामने हे पूरा हंगामा खडा था,
गलती से जूली छत पे बंद क्या हुई सारा होस्टल ताले पे जुटा पड़ा था,

थोडी देर में ताला टुटा तो लोगो की जान में जान आई ,
ये बात और है की थोडी हे देर में जूली फिर कई लातें खाई ,

जूली नाक में दम कर देती है अच्छे-अच्छो की,
कहानी पे यकीं कर लो कसम तुम्हे जुली के बच्चो की ,

(प्रस्तुत कविता सत्य घटनाओ पे आधारित है, पाठकों से विनम्र निवेदन है की वो इससे खिलाफ कोई भी शिकायत एनीमल राईट मूवमेंट वालों से ना करें😛 )
………………………………. Shubhashish (2004-05)

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19 Responses to “जूली – A real story”

  1. mehek अप्रैल 12, 2008 at 2:58 अपराह्न #

    🙂🙂 bahut khub,chaliye animal rightswalon se shikayat nahi karenge,magar vada kariyega koi juli ko laath nahi marega,itni pyari julie ko pyar se rakhana hostelwalon ka kaam hai:);)

  2. ZEN अप्रैल 13, 2008 at 3:15 पूर्वाह्न #

    Maza aya padhkar!!!

  3. ZEN अप्रैल 13, 2008 at 3:18 पूर्वाह्न #

    Maza aya!!

  4. shubhashishpandey अप्रैल 14, 2008 at 8:43 पूर्वाह्न #

    @Zen ji
    dhanyavad zen ji.

    @Mehek ji
    ab hum to college se nikal chuke hain par haan umeed karte hain ki hostel wale abhi bhi julee ko pyar se rakhte honge🙂

    mehek ji aap ke dwara ki tamam tippadiyo ke liye aap ko tah-e-dil se shukriya , par mujhe aap ke kewal tippadiyon ki he nahin balki sujhawo ka bhi intazar rahega.🙂

    dhnayavad.

  5. shyam_gkp अगस्त 19, 2008 at 8:15 पूर्वाह्न #

    Shubhashish ji,
    kavita achchhi hai. animal movement walo se koi complain nahi karega.

  6. Shubhashish Pandey अगस्त 21, 2008 at 4:17 अपराह्न #

    dhanyavad shyam ji🙂

  7. Rahul सितम्बर 30, 2008 at 11:49 पूर्वाह्न #

    very nice story i like it. i want to more…………..

  8. Shubhashish Pandey अक्टूबर 2, 2008 at 6:08 पूर्वाह्न #

    dhanayavad rahul ji

  9. M.haryanvi मार्च 4, 2009 at 5:12 पूर्वाह्न #

    tusi great ho yaar

  10. arhan मार्च 10, 2009 at 5:19 पूर्वाह्न #

    very nice……

  11. sombir मार्च 11, 2009 at 1:01 अपराह्न #

    really great

  12. Shubhashish Pandey मार्च 17, 2009 at 4:48 पूर्वाह्न #

    M. hryanvi ji Arhan ji aur Sombir ji aap sabhi logo ka bahut bahut shukriya

  13. ramesh kumar मार्च 23, 2009 at 5:50 पूर्वाह्न #

    bahut sundar

  14. Shubhashish Pandey मई 7, 2009 at 8:55 पूर्वाह्न #

    dhanyavad ramesh ji

  15. Ravi chaurasia जुलाई 3, 2009 at 12:48 अपराह्न #

    its boaring poem…you know…

  16. satish अगस्त 29, 2009 at 2:55 पूर्वाह्न #

    likhate bahut ache ho age kuch jarur banoge ye meri duaa hai. ye bahut acha laga hai.

Trackbacks/Pingbacks

  1. रुक्सत « Apurn - अप्रैल 29, 2008

    […] वो जाडो की रातों में श्री राम की चाय, जुली किसकी है ?? – करना इसपे […]

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