इश्क ने यहाँ कितनों को कोई और मुकद्दर दिया

2 जुलाई

इश्क ने यहाँ कितनों को कोई और मुकद्दर दिया
दिल को तन्हाई तो आँखों को समंदर दिया
इबादत-ए-इश्क में जिसे पूजते रहे खुदा मान कर
उस कातिल को इस इश्क ने ही तो खंजर दिया
…………………. Shubhashish

6 Responses to “इश्क ने यहाँ कितनों को कोई और मुकद्दर दिया”

  1. mehek जुलाई 2, 2008 at 11:45 पूर्वाह्न #

    इबादत-ए-इश्क में जिसे पूजते रहे खुदा मान कर
    उस कातिल को इस इश्क ने ही तो खंजर दिया
    wah bahut bahut khubsurat baat,ishq qatil bhi hai,sahi.

  2. vipin जुलाई 2, 2008 at 11:52 पूर्वाह्न #

    good

  3. Advocate Rashmi saurana जुलाई 2, 2008 at 12:02 अपराह्न #

    bhut sundar. likhate rhe.

  4. समीर लाल जुलाई 2, 2008 at 10:08 अपराह्न #

    बढ़िया है.

  5. limit जुलाई 4, 2008 at 7:01 पूर्वाह्न #

    उस कातिल को इस इश्क ने ही तो खंजर दिया
    ” bhut bhut sunder”
    Regards

  6. Shubhashish Pandey जुलाई 7, 2008 at 5:06 पूर्वाह्न #

    mehek ji , vipin ji , rashmi ji, sameer ji aur seema ji aap sabhi logo ka tah-e-dil se shukriya.

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