Archive | सितम्बर, 2009

ये रोग जिसे लग जाये

16 सितम्बर

ना नींद रहे ना चैन रहे , कुछ समझ ना मन को आये !

जब एक झलक की आस लिए दिल नाम वही दोहराये !

 कभी हँसता है कभी रोता है क्या हुआ है इस पागल को !

 इस इश्क का हाल तो जाने वही,  ये रोग जिसे लग जाये !

 

 तड़पता है मचलता है बस तेरी याद करता है !

तुझसे मिलने की कोशिश दिल मेरा दिन-रात करता है!

———————– Shubhashish

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