बरसात

29 मई

घर से निकला ही था की बरसात हो गयी
आज मौसम से अचानक यू मुलाकात हो गयी

जाने कब दिखी वो और हम यूँ ही कब तक खड़े रहे
पता भी नहीं चला की यहाँ कब रात हो गयी

यूँ तो तेरे होठों से लगी वो बस बारिश की एक बूँद थी
फिर जाने क्यों मेरी आँखों के लिए वो कायनात हो गयी

मौत भी लौट जाये गर मेरे होठों पे हो वो बूँद
जो तेरे होंठों को छू के आब-ए-हयात हो गयी
………………………………………. Shubhashish

6 Responses to “बरसात”

  1. pawan dhiman मई 29, 2010 at 4:37 अपराह्न #

    मेरी आँखों के लिए वो कायनात हो गयी..अति सुंदर

  2. रवि कुमार, रावतभाटा मई 29, 2010 at 7:08 अपराह्न #

    संभावनाएं तो हैं दोस्त…
    ब्लॉग का बाकी माल-मसाला भी देवनागरी में कर लें…शायद और अच्छा लगे…

  3. ravindra rajput जुलाई 24, 2010 at 12:11 पूर्वाह्न #

    One more poem which touched my heart !!!!!

  4. Shubhashish Pandey जुलाई 24, 2010 at 7:52 पूर्वाह्न #

    pawan dhiman ji, ravi kumar ji, seema gupta ji aur ravindra rajput ji aap sabhi logo ko tah-e-dil se shukriya

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  1. बरसात – tumblr :: Nitesh Gautam - अगस्त 19, 2016

    […] Source: बरसात | Apurn […]

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