सुकून

5 अक्टूबर

तमामो-उलझन और भाग दौड़ से आजिज
जब सुकून खोजता हुआ ये दिल
…जो जानता है की उसके पास
इससे बेहतर कोई तरकीब
तो हो ही नहीं सकती

तो सुकून पाने को ……
ठहर के देर तलक देखता हूँ …….तुझे…….. सिर्फ तुझे
……….. Shubhashish

क्या बताऊँ तुझे उदासी का सबब ऐ दोस्त की एक पूरी उम्र गुजारी जिसके साथ हर लम्हा,
और आज मर गया ……….. वही ख्वाब
………….Shubhashish

6 Responses to “सुकून”

  1. प्रवीण पाण्डेय अक्टूबर 5, 2010 at 3:26 अपराह्न #

    कुछ विचारों के घर में ठहर जाने से सुकून मिलता है।

    • Shubhashish Pandey 'Aalsi' अक्टूबर 17, 2010 at 9:01 अपराह्न #

      aapne sahi kaha praveen ji
      kavita tak aane ke liye shukriya

  2. sumanmeet फ़रवरी 16, 2012 at 10:09 पूर्वाह्न #

    आज पहली बार आपके ब्लॉग पर आई हूँ ..बहुत अच्छा लगा …अन्तिम पंक्तियाँ मन को छू गई ….

    • Shubhashish Pandey 'Aalsi' फ़रवरी 17, 2012 at 12:36 अपराह्न #

      suman ji swagat hai aap ka
      aap ne panktiyan pasand ki iske liye dhanyavad

  3. Ramesh Kumar Gupta मार्च 12, 2013 at 2:53 पूर्वाह्न #

    sukun parhkar sukun mila

  4. Shubhashish Pandey 'Aalsi' सितम्बर 4, 2013 at 2:50 अपराह्न #

    shukriya ramesh ji

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