Tag Archives: hasya vyang

The back bencherz

30 दिसम्बर

ये गाना कॉलेज टाइम में अपने Back Bencher साथियों के लिए लिखा था जिसे आज यहाँ प्रकाशित कर रहा हूँ. सबको तो नहीं कह सकता पर कुछ लोग को ये जरुर पसंद आएगी 🙂

देर से उठते हम यारों कभी जाते नहीं नहा के
ज्यादा जल्दी कम pressure तो निपटेंगे फिर आके
एक हाथ में कॉपी दुसरे में break-fast दबा के
college गए जैसे-तैसे तो late थे घंटे आधे
क्यूंकि
we are the back bencherz
we are the back bencherz
हमको नहीं है फिकर
we are the back bencherz

college देर से जाना
Teacher से नजर चुराना
आगे सीटें कितनी खाली
फिर भी सबसे पीछे जाना

भरी class में भी आराम से हैं सो जाते
boring lecture में cell पे करते interesting बातें
exams pass करने के method सबको हैं बतलाते
बस एक रात में पढ़कर नंबर सबसे ज्यादा लाते

क्यूंकि
we are the back bencherz
we are the back bencherz
हमको नहीं है फिकर
we are the back bencherz

खिड़की से बहार झांक यार
जरा उसको miss call मार यार
लड़कियों को जम के ताड़ यार
दिख जाये कोई मॉल यार

canteen के महफ़िल को हम ही रंगीन बनाते
कमेन्ट मारने से हम यारों कभी नहीं कतराते
girls, pair या faculty हो सबकी वाट लगाते
तभी बात करने में हमसे बड़े-बड़े घबराते

क्यूंकि
we are the back bencherz
we are the back bencherz
हमको नहीं है फिकर
we are the back bencherz

……………………. Shubhashish

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मैं इमरान हाशमी बनना चाहता हूँ

12 मई

(अपने बी.टेक. फाइनल इयर में जब मैंने ये कविता लिखी थी उस वक़्त unicode जैसी सहूलियत नहीं थी इसलिए मेरे दोस्त कुमार वरुण, जो की इस कविता के प्रेरणा भी थे (क्युकी वो कभी कभी बोलता की यार मैं इमरान हाश्मी बनना चाहता हूँ 😛 ) ने इसे हिंदी पैड पे लिख के jpeg फॉर्मेट में मेल में attach किया! आज मैं इसे unicode में यहाँ प्रस्तुत कर रहा हूँ )

 मैं इमरान हाशमी बनना चाहता हूँ 

पांचवी कक्षा की एक क्लास मे मास्टर ने बच्चों से पूछा
बताओ क्या बनोगे, कैसे करोंगे अपने माँ-बाप का नाम ऊँचा
किसी ने IAS. किसी ने PCS. किसी ने कहा अच्छा आदमी बनाना चाहता हूँ
तभी पीछे की सीट से उठकर एक बच्चे ने कहा
Sir! मैं इमरान हाशमी बनना चाहता हूँ

ऐसे जवाब की ख्वाब मे भी नही की थी कभी कल्पना
पर Teacher को लगा शायद हो ये लडके का बचपना
समझाया की बेटा गलती की है तुने Career को चुनने मे
ये तो बता क्या प्रॉब्लम है तुझे और कुछ बनने मे ???

लड़का बोला Sir! जॉब मे अभी कहाँ इतना पैसा है
और Business करना मुझे लगता बेवकूफों जैसा है
नेता फस जाते हैं Akshar स्टिंग ऑपरेशन के जंजाल मे
खेल मे Zahar भर दिया मैच फिक्सिंग के बवाल ने
पर फ़िल्म इंडस्ट्री मे प्रोफिट की लाइन हमेशा ऊपर चढ़ती है
बढ़िया काम से Price-Value तो बुरे से Popularity बढ़ती है
और इस बात को तो ख़ुद कई बड़े फ़िल्म समीक्षक माने है
MMS Clips से भी ज्यादा बिकते इमरान के फिल्मो के गाने है

मै भी ऐसे गाने कर अपनी लाइफ बदलना चाहता हूँ
इसीलिए तो Sir! मैं इमरान हाशमी बनाना चाहता हूँ

हुंह!!!! आज कल के लडके जाने पढ़ते हैं किस किताब से
Teacher का भी सर चक्र गया बच्चे के इस जवाब से
Teacher ने फ़िर भी पूछा उसमे ऐसी क्या बात समाई है
ये तो बता अभिषेक बच्चन बनने मे क्या बुराई है ???

सिर्फ़ दो फिल्मो से इतना नाम नही कमाया अभिषेक के बाप ने
Murder किया लड़किया फ़िर भी कहती .Aashiq Banaya Aap Ne…
मल्लिका,तनुश्री, उदिता निपटी पिछली फिल्मों की साइन मे
सुनाने मे आया है की अब सेलिना हृषिता भी है लाइन मे

मै भी ऐसे टेस्टी CHOCOLATE का स्वाद चखाना चाहता हूँ
इसीलिए तो Sir मैं इमरान हाशमी बनाना चाहता हूँ

अब मास्टर का गुस्सा पहुच गया सातवे आसमान पे
बोले.. सिवाय लड़किया घुमाने के क्या किया इमरान ने ??
Sir! लड़कियों को पीछे घुमाना कोई आसान काम नही
वरना बड़े Powerful लोगो का होता ये अंजाम नहीं

क्या नही जानते आप America के पूर्व राष्ट्रपति को ??
कैसे प्राप्त हुए मोनिका के चक्कर मे .वीरगति को
बदल गया कप्तान देश का सौरभ-नग्मा के टक्कर मे
Cricket खेलना भूल गया वो .नए खेल के चक्कर मे
मेरी इतनी बातों का मतलब बिलकुल सीधा-साफ है
काबिलियेत मे भी इमरान हाशमी. बिल क्लिंटन का बाप है

मैं भी एक Demanded और काबिल आदमी बनाना चाहता हूँ
इसीलिए तो Sir! मैं इमरान हाशमी बनाना चाहता हूँ

…………………………… Shubhashish ( 2006)

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जूली – A real story

12 अप्रैल

जमाने के सितम ने कर दिया बहुत बुरा हाल है,
इंजीनियरिंग कॉलेज में जूली का ये चौथा साल है,

यूँ तो क्लास में टीचर एंट्री देते नहीं इसे,
पर २-३ क्लास करके जूली ने मचाया काफी बवाल है,

कहाँ साल भर प्रिप्रेशन करने के बाद लड़के एडमिशन लेने आते हैं,
और फिर रहने के लिए हॉस्टल का एक ट्रीपल सीटर रूम पाते हैं,

पर जूली तो बचपन से ही हॉस्टल में अपनी मनमानी चलायी है,
किसी ट्रिपल सीटर में दिन तो सिंगल सीटर में रातें बिताई है,

वार्डेन महीनों में कभी चेक करे ये बड़ी बात हैं,
पर जूली कमरों में झांकती हर रात हैं,

दरवाजा बंद है तो अगले पे जाती है,
गर खुला मिल जाये तो बिस्तर पे आराम फरमाती है,

इतना ही नहीं जूली ने और भी कई गुल खिलाये हैं,
चंगु-मंगू नाम के दो बच्चे अपने गुलशन में उगाये हैं,

पर आजकल जूली घूमती तन्हा अकेली है,
उसके बच्चो का पिता कौन है ये अबुझ पहेली है,

हमारे पड़ोस वाले गुप्ता जी नशे में मस्त रहते हैं,
इनकी बक-बक से पूरे हॉस्टलवासी त्रस्त रहते हैं,

उस रात जूली उनके कमरे में सोई थी,
अपने टाइगर के खयालो में जाने कहाँ खोई थी,

इतने में गुप्ता जी नशे में अन्दर आये,
और जूली की बाहों में बिस्तर पर रात बिताये,

सुबह जब आँखे खुली तो गलती का एहसास था,
तन्हाई के सिवा अब कुछ नहीं जूली के पास था,

तब से वो पतला कुत्ता टाइगर भी साथ नहीं रहता है,
वो भी ज़माने की तरह जूली को बेवफा कहता है,

“अरे माफ़ कीजीयेगा…. जूली का परिचय देना तो भूल गया”

यूँ तो AKGEC के ब्वायेस हॉस्टल में इसे किसी परिचय की जरुरत नहीं,
पर जूली नाम की ये आवारा कुतिया जरा भी खूबसूरत नहीं ,

पर जूली का हॉस्टल से प्यार देखते हे बनता है,
साल में कई मौको पे इसका का बैर्थ-डे मानता है,

दर-असल जब भी जूली किसी का बर्थ-डे के खा जाती है ,
तो बर्थडे बॉय की बर्थडे बमप्स में लातें भी पाती है,

अरे एक बार तो मेरे आँखों के सामने हे पूरा हंगामा खडा था,
गलती से जूली छत पे बंद क्या हुई सारा होस्टल ताले पे जुटा पड़ा था,

थोडी देर में ताला टुटा तो लोगो की जान में जान आई ,
ये बात और है की थोडी हे देर में जूली फिर कई लातें खाई ,

जूली नाक में दम कर देती है अच्छे-अच्छो की,
कहानी पे यकीं कर लो कसम तुम्हे जुली के बच्चो की ,

(प्रस्तुत कविता सत्य घटनाओ पे आधारित है, पाठकों से विनम्र निवेदन है की वो इससे खिलाफ कोई भी शिकायत एनीमल राईट मूवमेंट वालों से ना करें 😛 )
………………………………. Shubhashish (2004-05)

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ये सेंसेक्स (हास्य व्यंग)

7 अप्रैल

1) सन सन कर के दौड़ रहा है जब से ये सेंसेक्स,
हर गली मोहल्ले खुल गए नए शोपिंग कॉम्प्लेक्स,
अब सब के बस का कहाँ रहा girlfriend पालना….

2) महाराष्ट्र में भारत माँ का फटा कलेजा
चाचा से भी आगे बढ़ता दिखा भतीजा
शहर क्या आप के बाप का ?

3) माँ और पत्नी झगड़ रही हैं, कौन है तेरा खास?
२४ घंटे फुफकार रहा ऑफिस में बैठा बॉस,
लाइफ की बैंड बज गयी ………

4) बुड्ढे माँ-बाप की जाने कब पूरी होगी आस,
कड़ी मेहनत कर के अपना पप्पू हो गया पास,
मगर क्या job लगेगी ?   

………………………….  Shubhashish