माँ

May 11, 2008

जो भी जॉब के लिए घर से दूर हैं शायद उन सब के दिल में यही जज्बात होंगे | 
ये चार लाईने मैं अपनी माँ के लिए लिखा हूँ, वैसे माँ को याद करने को लिए कोई दिन नहीं होता है माँ तो हमेशा हमारे दिल में रहती हैं  हैं लेकिन आज Mother’s Day के बहाने जरुर इन भावनाओ को यहाँ व्यक्त कर रहा हूँ  

कभी-कभी खुद अपनी तरक्की से भी हो जाता नाराज हूँ मैं
इसी भाग दौड़ में खुद अपनों से दूर हो गया आज हूँ मैं
जिस आंचल के साये में रह के किसी लायक बन पाया
उस माँ से ही मिलने को चन्द छुट्टी का मोहताज हूँ मैं
……………………………….. Shubhashish

 

 


इतनी गैरत नहीं

May 10, 2008

इस ज़िन्दगी में तुने पूरी की मेरी कोई हसरत नहीं,
मेरी खुशियों के लिए तू कुछ करे इतनी तुझे गैरत नहीं,
पर हम तो आखिरी दम तक तुझे दुवाएं ही देते जायेंगे,
क्यूंकि धोखा खाना तो मेरी किस्मत है पर धोखा देना मेरी फितरत नहीं|
………………………………………. Shubhashish(2005)


करते थे बातें इशारों पे जान देने की

May 9, 2008

अब चाहता हूँ तो जिन्दगी रुसवाई नही देती,
अन्धेरे मे अपनी परछाई भी दिखाई नही देती,
जो अब तक करते थे बातें इशारों पे जान देने की,
क्या अब उन्हें हमारी आवाज भी सुनाई नहीं देती?
………………………………… Shubhashish(2005)


जरुरत किसको नहीं होती

May 8, 2008

एतबार की जरुरत किसको नहीं होती,
एक यार की जरुरत किसको नहीं होती,
मिलता नहीं कोइ हमसफर साथ निभाने के लिये,
वरना प्यार की जरुरत किसको नहीं होती|
…………………………. Shubhashish(2005)


इम्तेहां हो गई

May 7, 2008

मोहब्बत की मेरे इम्तेहां हो गई,
सारी बातें खत्म बस यहां हो गई,
क्या से क्या हो गये जिनकी खातिर,
बातें अब ये उनके लिये बचपना हो गयीं|
……………………………. Shubhashish(2005)


कभी अकेला नही छोडा

May 6, 2008

ढूढता था कि कौन मेरा साथ निभायेगा साये की तरह,
सोचता था कि कौन मेरे जज्बातों को समझेगा यहाँ,
पर जब खयाल आया उनका जिन्होने हमे कभी अकेला नही छोडा,
तो लगा इन ‘ तन्हाइयों ‘ से अच्छा साथी मुझे मिलेगा कहाँ|
…………………………………. Shubhashish(2005)


कभी लडखडा के तो देख

May 5, 2008

यूँ तो हर चाहने वाला तेरे सपने सजाता निगाहों मे है,
पर कभी सोचा कि ये फूल बिखेरता कौन तेरी राहों में है,
तुझे बस अपनी ओर बुलाते हैं ये जमाने भर के हाथ,
पर कभी लडखडा के तो देख तु गिरती किसकी बाहों मे है|
………………………….. Shubhashish(2005)


मौसम

May 3, 2008

 …Unfortunately a true Love story

 

अजीब सी खामोशी के साथ धीमी बरसात है
शायद आज फिर से एक लम्बी रात है
निहारती हैं एक टक आँखे बाहर के मौसम को,
फिर से याद आ रही किसी मौसम की हर बात है

वो सुरूर मोहब्बत का, वो आँखों की प्यास
वो बेताब धड़कने, वो मिलने की आस
वो तन्हाईयों में अक्सर उनकी तस्वीर से बातें,
उनसे आँखे टकराने पर वो अजीब सा एहसास

उनके खयालो से मेरा दिल महकता था हर पल
उनके दिखने से मेरे खुशियों में होती थी हलचल
एक झलक के लिए पागल हम कोई अकेले नहीं थे
देख के मौसम को मौसम भी हो जाता था चंचल

जिंदगी खुश थी और मौसम खुशगवार था
पर शायद इतनी खुशियों से वक़्त को इंकार था
जाने क्या सोच कर ठुकरा दिया मौसम ने मुझे
मेरे सामने तो बस सवालों का अंबार था

मौसम में कई नए फूल खिलने लगे थे
जैसे तैसे हम अपने ज़ख्म सिलने लगे थे
अब मौसम के दिल का कुमार कोई और था
कई सवालों के जवाब भी हमे मिलने लगे थे

खैर!!
अब बहुत दूर हो चुके हैं अपनी जिंदगी के रास्ते
शायद दर्द भी ढल जाये यूँ ही आस्ते आस्ते
जाने क्यूँ समझ नहीं पाया इस छोटी सी बात को
अरे! मौसम तो होता ही है बदलने के वास्ते …
…………………………… Shubhashish(2005)


प्यार सामने होता है

May 2, 2008

प्यार सामने होता है उससे इकरार सामने होता है,
हम जिससे मोहब्बत करते हैं उसका इन्तजार सामने होता है,
इस दबे हुए दिल मे भी तब आँसू कि लडी लग जाती है,
जब किसी गैर कि बाहों मे अपना यार सामने होता है|
…………………………… Shubhashish(2005)

{संदर्भ :- कॉलेज में अकसर दो दोस्तों को एक ही लड़की पसंद होती है, अब बेचारा दूसरा दोस्त सिर्फ सब कुछ देखता है की जिसे वो पसंद करता है उसका wait उसी के सामने  कोई और कर रहा है   :P , मजाक नहीं यार, भावनाओ को समझो }


बड़ा अजीब सा है वो

April 30, 2008

यूँ कहने को तो कई दिल-अजीज सा है वो, 
पर फिर भी सच में बड़ा अजीब सा है वो, 

दिन रात गैरों को वही सब बाटता रहता,
जिस चीज़ के लिए खुद बहुत गरीब सा है वो,

कितने दोस्त हैं उसके ज़माने भर में लेकिन,
खुद अपनी किस्मत के लिए एक रकीब सा है वो, 

तमाम सितारों के बीच में भी जो तन्हा ही रह जाता, 
कुछ वैसे ही चाँद जैसा नसीब सा है वो,

भाई भाई के खून का जहाँ प्यासा हो गया,
उस ज़माने में भी एक अदब तहजीब सा है वो,

जब नीद नहीं आती तो उसको सोचता हूँ मैं,
वक़्त गुजारने को, मेरे लिए, एक तरकीब सा है वो, 
………………………………….. Shubhashish