December 30, 2008 by Shubhashish Pandey
ये गाना कॉलेज टाइम में अपने Back Bencher साथियों के लिए लिखा था जिसे आज यहाँ प्रकाशित कर रहा हूँ. सबको तो नहीं कह सकता पर कुछ लोग को ये जरुर पसंद आएगी
देर से उठते हम यारों कभी जाते नहीं नहा के
ज्यादा जल्दी कम pressure तो निपटेंगे फिर आके
एक हाथ में कॉपी दुसरे में break-fast दबा के
college गए जैसे-तैसे तो late थे घंटे आधे
क्यूंकि
we are the back bencherz
we are the back bencherz
हमको नहीं है फिकर
we are the back bencherz
college देर से जाना
Teacher से नजर चुराना
आगे सीटें कितनी खाली
फिर भी सबसे पीछे जाना
भरी class में भी आराम से हैं सो जाते
boring lecture में cell पे करते interesting बातें
exams pass करने के method सबको हैं बतलाते
बस एक रात में पढ़कर नंबर सबसे ज्यादा लाते
क्यूंकि
we are the back bencherz
we are the back bencherz
हमको नहीं है फिकर
we are the back bencherz
खिड़की से बहार झांक यार
जरा उसको miss call मार यार
लड़कियों को जम के ताड़ यार
दिख जाये कोई मॉल यार
canteen के महफ़िल को हम ही रंगीन बनाते
कमेन्ट मारने से हम यारों कभी नहीं कतराते
girls, pair या faculty हो सबकी वाट लगाते
तभी बात करने में हमसे बड़े-बड़े घबराते
क्यूंकि
we are the back bencherz
we are the back bencherz
हमको नहीं है फिकर
we are the back bencherz
……………………. Shubhashish
Posted in Hasya kavita, Kavita | Tagged कला, कविता, मुक्तक, शुभाशीष, शेर, हास्य, हास्य कविता, हास्य व्यंग, hasya, hasya kavita, hasya vyang, Shubhashish | 19 Comments »
November 3, 2008 by Shubhashish Pandey
कमबख्त! अजीब खेल है ये इश्क और दीवानगी का,
चैन उम्मीद करते हैं खुद को कांटे चुभोने के बाद,
क्या चला गया ये सोचना तो फिजूल ही था,
क्या रह गया, ये सोचा नहीं तुझे खोने के बाद,
तबसे ना देखा तुझे ना तेरा नाम जुबान पे आने दिया,
पर क्यों नहीं काबू रहता खुद पे सोने के बाद,
बेशक लोग देते होंगे हसने को तब्बजो,
पर हमें सुकून आता है थोडा रोने के बाद!
………………………. Shubhashish
Posted in Kavita, Shayari - Muqtak | Tagged कला, कविता, मुक्तक, शायरी, शुभाशीष, शेर, Kavita, muqtak, shayari, Shayari - Muqtak, Sher, Shubhashish | 24 Comments »
September 5, 2008 by Shubhashish Pandey
शिक्षक दिवस के अवसर पर ये चार पंक्तियाँ गुरुजनों को समर्पित …
ज्ञान से ज्यादा मूल्यवान क्या है इस संसार में,
दाने से बड़ा दूसरा कृत्य क्या है इस ब्रह्माण्ड में,
जो ज्ञान दान से हृदय प्रकाशित करते हैं मुझ तुच्छ का,
शत बार शीष झुकाता हूँ उन गुरुवों के सम्मान में !
……………………………… Shubhashish
Posted in Shayari - Muqtak | Tagged कला, कविता, मुक्तक, शायरी, शिक्षक, शिक्षक दिवस, शुभाशीष, शेर, Kavita, muqtak, shayari, Shayari - Muqtak, Sher, Shubhashish, Teacher's day | 5 Comments »
August 27, 2008 by Shubhashish Pandey
1)
अक्सर कुछ उदास हो एक मोड़ पे आ ठहरता है,
जाने कौन सा रिश्ता है ये .. ना बनता है ना बिखरता है !
2)
मैं तुम्हे समझा नहीं या तुम मुझे समझे नहीं,
बात इतनी ही है शायद, की हम कभी बदले नहीं !
………………. Shubhashish
Posted in Shayari - Muqtak | Tagged कला, कविता, दोस्ती, मुक्तक, शायरी, शुभाशीष, शेर, dosti, Kavita, muqtak, shayari, Shayari - Muqtak, Sher, Shubhashish | 5 Comments »
August 6, 2008 by Shubhashish Pandey
दर्द कितना हो पर आंखे आसूवों को रोने नहीं देतीं
मेरी बेखुदी मेरे इश्क की खबर तेरी यादों को भी नहीं होने देतीं
गर मेरे इश्क का पता तेरी यादों को लग जाये तो परेशान हो जाये तू
क्युकी फिर ये हिचकियाँ रात भर तुझे सोने नहीं देतीं
……………………………….. Shubhashish
Posted in Shayari - Muqtak | Tagged कला, कविता, दोस्ती, मुक्तक, शायरी, शुभाशीष, शेर, dosti, Kavita, muqtak, shayari, Shayari - Muqtak, Sher, Shubhashish | 6 Comments »