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ना नींद रहे ना चैन रहे , कुछ समझ ना मन को आये !

जब एक झलक की आस लिए दिल नाम वही दोहराये !

 कभी हँसता है कभी रोता है क्या हुआ है इस पागल को !

 इस इश्क का हाल तो जाने वही,  ये रोग जिसे लग जाये !

 

 तड़पता है मचलता है बस तेरी याद करता है !

तुझसे मिलने की कोशिश दिल मेरा दिन-रात करता है!

———————– Shubhashish

The back bencherz

ये गाना कॉलेज टाइम में अपने Back Bencher साथियों के लिए लिखा था जिसे आज यहाँ प्रकाशित कर रहा हूँ. सबको तो नहीं कह सकता पर कुछ लोग को ये जरुर पसंद आएगी :)

देर से उठते हम यारों कभी जाते नहीं नहा के
ज्यादा जल्दी कम pressure तो निपटेंगे फिर आके
एक हाथ में कॉपी दुसरे में break-fast दबा के
college गए जैसे-तैसे तो late थे घंटे आधे
क्यूंकि
we are the back bencherz
we are the back bencherz
हमको नहीं है फिकर
we are the back bencherz

college देर से जाना
Teacher से नजर चुराना
आगे सीटें कितनी खाली
फिर भी सबसे पीछे जाना

भरी class में भी आराम से हैं सो जाते
boring lecture में cell पे करते interesting बातें
exams pass करने के method सबको हैं बतलाते
बस एक रात में पढ़कर नंबर सबसे ज्यादा लाते

क्यूंकि
we are the back bencherz
we are the back bencherz
हमको नहीं है फिकर
we are the back bencherz

खिड़की से बहार झांक यार
जरा उसको miss call मार यार
लड़कियों को जम के ताड़ यार
दिख जाये कोई मॉल यार

canteen के महफ़िल को हम ही रंगीन बनाते
कमेन्ट मारने से हम यारों कभी नहीं कतराते
girls, pair या faculty हो सबकी वाट लगाते
तभी बात करने में हमसे बड़े-बड़े घबराते

क्यूंकि
we are the back bencherz
we are the back bencherz
हमको नहीं है फिकर
we are the back bencherz

……………………. Shubhashish

कमबख्त! अजीब खेल है ये इश्क और दीवानगी का,
चैन उम्मीद करते हैं खुद को कांटे चुभोने के बाद,

क्या चला गया ये सोचना तो फिजूल ही था,
क्या रह गया, ये सोचा नहीं तुझे खोने के बाद,

तबसे ना देखा तुझे ना तेरा नाम जुबान पे आने दिया,
पर क्यों नहीं काबू रहता खुद पे सोने के बाद,

बेशक लोग देते होंगे हसने को तब्बजो,
पर हमें सुकून आता है थोडा रोने के बाद!
………………………. Shubhashish

नमन

शिक्षक दिवस के अवसर पर ये चार पंक्तियाँ गुरुजनों को समर्पित …

ज्ञान से ज्यादा मूल्यवान क्या है इस संसार में,
दाने से बड़ा दूसरा कृत्य क्या है इस ब्रह्माण्ड में,
जो ज्ञान दान से हृदय प्रकाशित करते हैं मुझ तुच्छ का,
शत बार शीष झुकाता हूँ उन गुरुवों के सम्मान में !
……………………………… Shubhashish

1)
अक्सर कुछ उदास हो एक मोड़ पे आ ठहरता है,
जाने कौन सा रिश्ता है ये .. ना बनता है ना बिखरता है !

2)
मैं तुम्हे समझा नहीं या तुम मुझे समझे नहीं,
बात इतनी ही है शायद, की हम कभी बदले नहीं !

………………. Shubhashish

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