मेरा पहला गीत – Back-Benchers

5 सित


अगर इसे  पढ़कर/देखकर आपको भी अपने कॉलेज की याद आये तो इसे अपने मित्रो के साथ साझा जरुर करें

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देर से  उठना  … काहे  का  नहाना ….

देर से उठना काहे का नहाना
बाल भीगा के जरा Deo लगाना
हाथ में कॉपी होठों में सुट्टा दबा के
Late Entry कर 2-4 Proxy लगाना

सब की जुबान पे हमारी कहानी
बातें हमारी Danger

WE are The Back-Benchers
We are The Back-Benchers
We are The Back-Benchers
We are The Back-Benchers

Lecture है boring तो फ़ोन पे बात कर
Class में सो लेने दे जागना है रात भर
पढना-वढना  साली अपनी style नहीं
Last-Night-Fight के हम हैं Master

अपनी बिंदासी का FAN ये ज़माना सारा
रहते हम ऐसे बेफिक्र

We are The Back-Benchers
We are The Back-Benchers
We are The Back-Benchers
We are The Back-Benchers

Canteen में मिलते हम यही अपना ठिकाना
अच्छे-अच्छों  को  भी इशारों पे नाचना
Classes bunk करने में अपनी PHD यारों
रातें सारी  B.C.-Baazi में उडाना

Girls, Couples क्या  H.O.D. की भी ले लेते हम
हमे नहीं किसी का डर

We are The Back-Benchers
We are The Back-Benchers
We are The Back-Benchers
We are The Back Benchers

Baaaack bencherzzzz

……………………………………… Shubhashish Pandey ‘आलसी’

ज़ज्बात

25 जन

अड़ा बैठा है वो मुझसे मेरे ज़ज्बात सुनने को
नहीं है मानता जिद्दी है कितना सख्त कितना है
बड़ी मुश्किल है, गर बयां करे भी तो करें कैसे
ना तो लब्ज़ इतने हैं ना तो वक़्त इतना है
……………………………. Shubhashish

यूँ हीं…. (2)

17 फ़र

यूँ हीं….

2 मई

यूँ हीं.....

…..खोना

18 अप्रै

मैगी – The Bachelor’s Lifeline

23 मार्च

Students-Hostellers का रखती ख्याल है Maggi
Bachelors के लिए तो कसम से बवाल है Maggi

Breakfast, Lunch या dinner खाओ जब भी जी चाहे
Utilization की जीती जागती मिसाल है Maggi

Egg, Chiken, Paneer, veg कितने रूप हैं इसके
मनभावन स्वाद की एक तरण-ताल है Maggi

महगाई का जवाब तो नहीं सरकार के भी पास
खुद महगाई के लिए बन गयी सवाल है Maggi

कुछ और ना हो इसका स्टॉक में होना जरुरी है
अपने लिए तो जैसे चावल-दाल है Maggi

मियां-बीवी जो दोनों लौटे थक के ऑफिस से
फिर dinner में अक्सर होती इस्तेमाल है Maggi

कभी था डर बीवी रूठी तो सोना पड़ेगा भूखे ही
अबला पुरुषों के लिए बन गयी ढाल है Maggi

टेडी-मेडी, सुखी-गीली फिर भी स्वाद में डूबी
बयां करती है क्या ज़िन्दगी का हाल है Maggi

गुजारी हमने कैसे ज़िन्दगी, मत पूछ ‘आलसी’
कि मेरी ज़िन्दगी के भी कई साल हैं Maggi

……………………..By Shubhashish Pandey ‘आलसी’

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खुशनसीब …… या बदनसीब….

8 दिस

वो अक्सर मेरे पास मुस्कुराते हुए आता
और बड़े गुमान से बताता
यार !
मुझे तो कभी हुआ ही नहीं
‘ये प्यार’ ….
एक दिन मुझसे भी जवाब निकल ही गया
जाने तुझे क्या कहना चाहिए

खुशनसीब ……
की तुझे कभी
गुजरना नहीं पड़ा
दर्द के उस सैलाब से
जो कई बार दे जाता है उम्र भर की उदासी

या

बदनसीब….
की तुझे कभी
एहसास ही नहीं हुआ
दुनिया की उस सबसे खुबसूरत चीज़ का
जिसके लिए लोग
जानते हुए भी
हर दर्द को उठाने के लिए तैयार हो जाते हैं ………
सिर्फ उस एहसास के लिए …
वही एहसास …
जो इन्सान को…. इन्सान बनाता है
……………. Shubhashish

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