अड़ा बैठा है वो मुझसे मेरे ज़ज्बात सुनने को
नहीं है मानता जिद्दी है कितना सख्त कितना है
बड़ी मुश्किल है, गर बयां करे भी तो करें कैसे
ना तो लब्ज़ इतने हैं ना तो वक़्त इतना है
……………………………. Shubhashish
ज़ज्बात
25 जन- टिप्पणियाँ 1 टिप्पणी
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यूँ हीं…. (2)
17 फ़रTags: शुभाशीष, hindi poem, hindi poetry, Kavita, shayari, Shayari - Muqtak, Sher, Shubhashish, shubhashish pandey
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यूँ हीं….
2 मईTags: कला, कविता, मुक्तक, शायरी, शुभाशीष, शेर, hindi poem, hindi poetry, Kavita, Shayari - Muqtak, Sher, Shubhashish, shubhashish pandey
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- श्रेणी Shayari - Muqtak
…..खोना
18 अप्रैTags: शायरी, शुभाशीष, शेर, hindi poem, hindi poetry, Kavita, Shubhashish, shubhashish pandey, yaadein
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- श्रेणी Kavita
मैगी – The Bachelor’s Lifeline
23 मार्चStudents-Hostellers का रखती ख्याल है Maggi
Bachelors के लिए तो कसम से बवाल है Maggi
Breakfast, Lunch या dinner खाओ जब भी जी चाहे
Utilization की जीती जागती मिसाल है Maggi
Egg, Chiken, Paneer, veg कितने रूप हैं इसके
मनभावन स्वाद की एक तरण-ताल है Maggi
महगाई का जवाब तो नहीं सरकार के भी पास
खुद महगाई के लिए बन गयी सवाल है Maggi
कुछ और ना हो इसका स्टॉक में होना जरुरी है
अपने लिए तो जैसे चावल-दाल है Maggi
मियां-बीवी जो दोनों लौटे थक के ऑफिस से
फिर dinner में अक्सर होती इस्तेमाल है Maggi
कभी था डर बीवी रूठी तो सोना पड़ेगा भूखे ही
अबला पुरुषों के लिए बन गयी ढाल है Maggi
टेडी-मेडी, सुखी-गीली फिर भी स्वाद में डूबी
बयां करती है क्या ज़िन्दगी का हाल है Maggi
गुजारी हमने कैसे ज़िन्दगी, मत पूछ ‘आलसी’
कि मेरी ज़िन्दगी के भी कई साल हैं Maggi
……………………..By Shubhashish Pandey ‘आलसी’
Tags: कविता, मुक्तक, मैगी, शायरी, शुभाशीष, शेर, हास्य, हास्य कविता, hasya kavita, hindi poem, hindi poetry, Kavita, maggi, muqtak, shayari, Shayari - Muqtak, Sher, Shubhashish, shubhashish pandey
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खुशनसीब …… या बदनसीब….
8 दिसवो अक्सर मेरे पास मुस्कुराते हुए आता
और बड़े गुमान से बताता
यार !
मुझे तो कभी हुआ ही नहीं
‘ये प्यार’ ….
एक दिन मुझसे भी जवाब निकल ही गया
जाने तुझे क्या कहना चाहिए
खुशनसीब ……
की तुझे कभी
गुजरना नहीं पड़ा
दर्द के उस सैलाब से
जो कई बार दे जाता है उम्र भर की उदासी
या
बदनसीब….
की तुझे कभी
एहसास ही नहीं हुआ
दुनिया की उस सबसे खुबसूरत चीज़ का
जिसके लिए लोग
जानते हुए भी
हर दर्द को उठाने के लिए तैयार हो जाते हैं ………
सिर्फ उस एहसास के लिए …
वही एहसास …
जो इन्सान को…. इन्सान बनाता है
……………. Shubhashish
Tags: कला, कविता, खुशनसीब ...... या बदनसीब...., मुक्तक, शायरी, शुभाशीष, शेर, hindi poem, hindi poetry, Kavita, Shayari - Muqtak, Sher, Shubhashish, shubhashish pandey
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- श्रेणी Kavita, Shayari - Muqtak
ख्वाहिश
14 अक्टूबेसबब जूझना थकना और फिर से खुद से लड़ जाना
टूट जाने की हद तक चुप-चाप हर गम को सह जाना
तब होती है उसकी बाँहों में बिखर जाने की वो ज़िन्दगी सी तलब
पर आखिरी ख्वाहिश की तरह उस ख्वाहिश का भी आखिर तक रह जाना
…………………………… Shubhashish
Tags: शायरी, शुभाशीष, शेर, shayari, Shayari - Muqtak, Sher, Shubhashish, shubhashish pandey
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