भटकाव – The Dilemma

11 अप्रैल

जाने कहाँ खो गयी है शक्ति धैर्य विवेक की,
ना कामना जीवन की है ना मृत्यु के अभिषेक की,

जीवन की इस रुग्ड़ता से व्यथित हो गया घोर मैं,
सूझता नहीं लक्ष्य को लक्षित करूं किस ओर मैं,

सोचता हूँ की क्या मैं भी ईश्वर का ही अंश हूँ,
या इस धरा को व्यथित करता कोई विषदंश हूँ,

किंकर्त्वयविमुढ़ सा हूँ बहुत विक्षिप्त मैं,
पर इस आहत ह्रदय को करूं कैसे तृप्त मैं,

मॅन की इस अवस्था से आत्मा भी विद्ऋण है,
जीवन की जीवनी शक्ति भी लगता अब बहुत क्षीण हैं,

ना कोई उत्साह है ना कोई है जिज्ञासा,
कल का दिन अच्छा आएगा इसकी भी नहीं तनिक आशा,

जाने किस दिशा ले जा रही जीवन की ये नाव है,
मार्ग है ये ईश्वर का या स्वयं से भटकाव है|                 
 
…………………………. Shubhashish(2004) 

2 Responses to “भटकाव – The Dilemma”

  1. mehek अप्रैल 11, 2008 at 6:41 पूर्वाह्न #

    bahut marmik sundar rachana hai,kabhi hum khud se hi bhatak bhi jate hai,aur sab begana mehsus hota,pura jahan,khair hum insaan hai shayad isliye,kal ki aasha ho dil mein,magar kabhi wo kal hi nahi aata aur jeevan samapt ho jata hai,bahut badhai.

  2. hemjyotsana "Deep" मई 30, 2008 at 1:56 अपराह्न #

    जाने कहाँ खो गयी है शक्ति धैर्य विवेक की,
    ना कामना जीवन की है ना मृत्यु के अभिषेक की,

    जीवन की इस रुग्ड़ता से व्यथित हो गया घोर मैं,
    सूझता नहीं लक्ष्य को लक्षित करूं किस ओर मैं,

    …….
    मॅन की इस अवस्था से आत्मा भी विद्ऋण है,
    जीवन की जीवनी शक्ति भी लगता अब बहुत क्षीण हैं,

    .
    jivan ki moh-maya mein aadhe fase man ka sundar chritran hai , jivan ki uljhan hai ya uljhan sa jivan hai.

    waah bahut achi kavita hai
    badhaai savikaar kare

    saadar
    hemjyotsana

एक उत्तर दें

Fill in your details below or click an icon to log in:

WordPress.com Logo

You are commenting using your WordPress.com account. Log Out / बदले )

Twitter picture

You are commenting using your Twitter account. Log Out / बदले )

Facebook photo

You are commenting using your Facebook account. Log Out / बदले )

Google+ photo

You are commenting using your Google+ account. Log Out / बदले )

Connecting to %s

%d bloggers like this: