तुने अनदेखा किया

8 अप्रैल

देख के भी तुने कितनी बार अनदेखा किया,
पर दिल आखों मे आंसू भर के भी मुस्कूराया है,
तेरी चाहत मे खुद की नज़रों से गिर गये पर,
तुझे हमेशा अपनी पलकों पर बिठाया है,
मेरे ज़ज़्बात भी मेरे दिल को कचोटते है,
पर तुझे मेरे दिल कि परवाह कहाँ,
कभी अपना दोस्त भी ना समझा तुने,
पर हमने हर बार अपना फर्ज निभाया है|
…………………………. Shubhashish(2004)

3 Responses to “तुने अनदेखा किया”

  1. lovelykumari अप्रैल 8, 2008 at 7:22 अपराह्न #

    main to aisa pyar nhi kr skti🙂 achchhi kvita likhi.aapki ek narajgi dur krne ke liye maine kuchh likha hai.sanchika(sanchika.blogspot.com) me dekh lijiyega..

  2. mehhekk अप्रैल 9, 2008 at 4:26 पूर्वाह्न #

    wah kya baat hai bahut badhiya.

  3. alpana अप्रैल 9, 2008 at 9:47 पूर्वाह्न #

    achchee koshish hai

एक उत्तर दें

Fill in your details below or click an icon to log in:

WordPress.com Logo

You are commenting using your WordPress.com account. Log Out / बदले )

Twitter picture

You are commenting using your Twitter account. Log Out / बदले )

Facebook photo

You are commenting using your Facebook account. Log Out / बदले )

Google+ photo

You are commenting using your Google+ account. Log Out / बदले )

Connecting to %s

%d bloggers like this: