बस एक ख्वाब हो तुम

14 मई

सच कहू तो बस एक ख्वाब हो तुम,
दोस्ती नही की तुम से कुछ पाने के लिए,
अपनी बातों से बस तुम्हे हॅसाना चाहता हूँ,
क्यूंकि वजह कम है मेरे पास मुस्कुराने के लिये,
ना समझना मुझे परवाना अपनी लौ का,
तुझमें जलने कि मुझको कोई ख्वाहिस नही है,
मैं तो जलके पहले ही आफताब हो गया हूँ,
तेरी दुनियाँ में आया हूं बस जगमगाने के लिये|
………………………… Shubhashish

7 Responses to “बस एक ख्वाब हो तुम”

  1. समीर लाल मई 14, 2008 at 1:55 अपराह्न #

    बढ़िया है.

  2. anurag arya मई 14, 2008 at 1:56 अपराह्न #

    तो जलके पहले ही आफताब हो गया हूँ,
    तेरी दुनियाँ में आया हूं बस जगमगाने के लिये|

    kya bat hai…

  3. Shubhashish Pandey मई 15, 2008 at 6:31 पूर्वाह्न #

    dhanyavad sameer ji dhanyavad anurag ji

  4. niyamak जून 7, 2008 at 6:46 पूर्वाह्न #

    लब पे आती है दुआ बनके तमन्ना मेरी

    जिन्दगी शम्मा की सुरत हो ख़ुदाया मेरी

    दूर दुनिया का मेरे दम अँधेरा हो जाए
    हर जगह मेरे चमकने से उजाला हो जाये

    Lage raho….

  5. Shubhashish Pandey जून 7, 2008 at 11:32 पूर्वाह्न #

    in panktiyon ke liye bahut bahut dhnyavad niyamak ji

  6. M.haryanvi अप्रैल 22, 2009 at 5:13 पूर्वाह्न #

    Riyali you great
    your fen (M.H)

  7. KRISHAN KUMAR जुलाई 8, 2009 at 11:44 पूर्वाह्न #

    DOST tarif ke liye mere pas SABD HI NAHi HAI

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